Wednesday, February 8, 2023
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हैरतअंगेज : सपा विधायक इरफान सोलंकी की अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान केस डायरी ना भेजने पर अमिताभ बाजपेई के विवादित बोल

कानपुर के पुलिस अधिकारियों को भेंट करनी चाहिए चूडिय़ां, बेचे जा रहे हैं थाने

जन एक्सप्रेस। कमलेश फाइटर
कानपुर नगर। बीते दिन सपा विधायक एक निजी चैनल के माध्यम से अमिताभ वाजपेई सीधे-सीधे योगी सरकार और कानपुर कमिश्नरेट पुलिस के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए दिखाई दिए। इस दौरान विधायक ने यहां तक कह डाला कि कानपुर के पुलिस अधिकारियों को चूड़ी भेंट करनी चाहिए कयोंकि पुलिस अधिकारी थाने बेचने का काम कर रहे हैं और जो थानेदार जितना ज्यादा दागी है उसे उतना ही ज्यादा अच्छा थाना दिया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक निशाना बनाए जा रहे हैं। उनके द्वारा यह विवादित बोल इसलिए बोले गए क्योंकि सपा विधायक इरफान सोलंकी की बीती 25 नवंबर को होने वाली अग्रिम जमानत की सुनवाई पर पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट नहीं भेजी थी।

केस डायरी जा सकती थी कोर्ट, पुलिस का रवैया नकारात्मक
सपा विधायक अमिताभ बाजपेई द्वारा कानपुर कमिश्नरेट पुलिस पर आरोप लगाते हुए बताया गया कि 25 नवंबर को पुलिस ने कोर्ट में यह बताया कि आईओ नहीं थे। ऐसे में पुलिस आई के सहयोगी के द्वारा रिपोर्ट भेज सकती थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुलिस का यह रवैया नकारात्मक है।

पुलिस अधिकारियों को चूड़ी भेंट करनी चाहिए
सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने विवादित बोल बोलते हुए कहा कि कानपुर पुलिस का रवैया नकारात्मक है। पुलिस अधिकारियों को तो चूड़ी भेंट करनी चाहिए। वो अधिकारी जो लगातार थानों को बेचने में लगे हैं। जिन थानेदारों की शिकायतें जाती हैं तो उन थानेदारों को औश्र बेहतर थाना दे दिया जाता है।

पुलिस सख्ती कर रही समाजवादियों पर
अमिताभ बाजपेई द्वारा पुलिस पर यह भी आरोप लगाए गए कि पुलिस सिर्फ समाजवादियों पर सख्ती कर रही है। यदि भाजपा के लोग सडक़ पर पुलिस को मारें। एक नहीं कई ऐसी धटनाएं हुई हैं। मुख्य चौराहों पर भाजपा के लोगों ने पुलिस को दौड़ा दौड़ाकर मारा। पुलिस की हिम्मत नहीं पड़ी कि किसी के घर जाकर दबिश डाल सके।

इरफान सोलंकी की गिरफ्तारी के साथ ही अग्रिम जमानत खारिज कराने को पुलिस ने की है मजबूत तैयारी

फरार चल रहे सपा विधायक इरफान सोलंकी और उसके भूमाफिया भाई रिजवान सोलंकी की गिरफ्तारी किसी भी समय हो सकती है ऐसा पुलिस सूत्रों का दावा है। इसके साथ साथ कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक दिसंबर से पहले गिरफ्तारी ना कर पाने की दशा में अपना पक्ष मजबूती से रखने का मन बना लिया है। बीते दिन पुलिस ऑफिस के आसपास चर्चा का केंद्र कुछ बिंदु बने रहे। जिन बिंदुओं के आधार पर कानपुर पुलिस सोलंकी बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय के समक्ष खारिज करा पाने के संबंध में सही साबित हो सकती है।

(1) अग्रिम जमानत मिलने का आधार यह होता है कि क्या आरोपी दौरान विवेचना और ट्रायल में सहयोग करेगा या नही? (इस केस में आरोपी लगातार सोलंकी बंधु फरार हंै और विवेचना में कतई सहयोग भी नहीं कर रहे हैं। बल्कि असहयोग कर रहे हैं। कुछ बता भी नहीं रहे हैं, फरार चलने के कारण आरोपी के आचरण को देखकर ऐसे में उन्हें मिलने वाले बेल का अधिकार समाप्त हो सकता है।

(2) दूसरा बिंदु यह है कि क्या आरोपी अग्रिम जमानत पाने के बाद साक्ष्य के साथ कोई टेंपरिंग छेड़ छाड़ तो नही करेगा। इस केस में लगातार सोलंकी बंधु जो आरोपी हैं अपने रसूख, अपने प्रभाव से लगातार अपनी फिजिकल लोकेशन बदल-बदल के केस के एविडेंस के साथ छेड़छाड़ में संलिप्त है। आगजनी को पटाखे की आग बता कर, सीसीटीवी फुटेज क्रिएट करके, प्रतिनिधि मंडल जो घटना के समय मौजूद ही नही था उनका प्रभाव इस्तेमाल करके, साक्ष्य की विश्वसनीयता को झुटला रहा था। परंतु फोरेंसिक वैज्ञानिक जांच में स्पष्ट हो गया कि अभियोजन की बात सही है आगजनी के विषय में पटाखे की बात पूर्णतया गलत वा काल्पनिक निकली।
परंतु आरोपी का कंडक्ट आचरण साक्ष्य को प्रभावित करने का स्वयं सिद्ध हो गया। अर्थात बेल का आधार यहां भी समाप्त हो सकता है।

(3) यह भी तय करना होता है कि दौरान विवेचना और ट्रायल आरोपी वादी एवम अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप में, किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेगा, उन्हें भय भीत नही करेगा। इस केस में लगातार इस तीसरी अनिवार्य शर्त का भी उल्लंघन होता हुआ दिखाई देने की आशंका है।

(4) आरोपी द्वारा अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र माननीय कोर्ट में तब दिया जब उसने लगातार फरार रहकर, केस की विवेचना में सहयोग करने की जगह उल्टा विवेचना को प्रभावित करने का अपकृत्य किया। आरोपी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म में, मीडिया में अलग-अलग लोकेशन चेंज करके इंटरव्यू देता रहा पर विवेचक के सामने क्यू नही आ रहा। मतलब जिसके सामने आरोपी को कानूनी रूप से उपस्थित होना था वहां हाजिर न होके बाकी सब जगह जा रहा है। आरोपी का ये कंडक्ट आचरण सिद्ध करता है की आरोपी विवेचना में सहयोग नही कर रहा है और भाग रहा है, फरार है।

(5) पांचवां बिंदु यह है कि कोर्ट में आरोपी ने अग्रिम जमानत एप्लिकेशन तब लगाई जब विवेचक अर्थात अभियोजन ने लगातार आरोपी को ढूंढने के सारे प्रयास कर लिए, सारे प्रयास विफल हो गए। तब माननीय कोर्ट ने अभियोजन के सारे तथ्य एवम परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए गैरजमानती वारंट की अनुमति दी। तब जाकर कानून का शिकंजा कसने पर दोनों आरोपियों ने मजबूर होकर अग्रिम जमानत की एप्लिकेशन लगाई। यह बिंदु व्याप्त चर्चाओं के आधार पर लिखे गए हैं।

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