Friday, December 9, 2022
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श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन महारास लीला, कंस वध का वर्णन 

बलरामपुर । जनपद बलरामपुर के वीर विनय चौक स्थित हनुमान गढ़ी पर चल रहे श्रीमद्भभागवत के छठवें दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास भीष्म पितामह महाराज ने कहा कि एकादशी व्रत का अपने आप में बहुत महत्व है । माह में दो एकादशी पड़ता है, सभी को एकादशी का व्रत रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि उपवास का अर्थ भगवान के नजदीक रहना होता है, जबकि उपास का अर्थ बिना भोजन के रहना होता है जिसमें शरीर को कष्ट पहुँचता है । उपवास तब होता है जब हम शरीर की प्रत्येक इंद्रियों के माध्यम से भगवान की भक्ति करते हैं। प्रभु के नाम, रूप, लीला, धाम में से किसी की भी प्राप्ति से भगवान के भक्ति की प्राप्त होती है ।  कथा व्यास ने कहा जब तक भक्ति श्रेष्ठ न हो जाये मनुष्य को कर्मकांड नही छोड़ना चाहिये । जब तक शक्ति सामर्थ्य रहे कर्मकांड करते रहना चाहिए । नियम ही कर्मकांड है, कर्मणो गहनो गति… लेकिन कर्म गहन है जिसे समझना आसान नहीं है । मनुष्य सुख की लोलुप्ता में भगवान को भूल जाता हैं । नंद बाबा जब नदी में रात्रि को स्नान करने के लिए जाते हैं तो पैर फिसलने से नदी में डूब जाते हैं । भगवान वरूण के पार्षद नंद बाबा को जल लोक लेकर चले जाते हैं। श्रीकृष्ण को ज्ञात होने पर वो यमुना नदी में प्रवेश करके नंद बाबा को लेकर आते हैं जिसपर नंद बाबा, गोपी ग्वाल मानते हैं कि श्रीकृष्ण कोई साधारण व्यक्ति नहीं है । सबके अनुरोध पर श्रीकृष्ण सभी को जल लोक का दर्शन करवाते हैं । भगवान सुकदेव कहते हैं राजन शास्त्र में श्रीकृष्ण के रानियों की गणना है परंतु गोपियों के संख्या की नहीं, गोपियाँ श्रीकृष्ण से अत्यन्त प्रेम करती है, वो सब श्रीकृष्ण से पूछती है कि आप किससे अधिक प्रेम करते हैं जिस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कोई मुझसे प्रेम करे या न करें मैं सबसे करता हूँ । जब श्रीकृष्ण गोपियों के बीच से अंतर्ध्यान हो जाते हैं तब गोपियाँ श्रीकृष्ण के विरह में जगह जगह फिरती है और वृक्षों लताओं से लिपट कर श्रीकृष्ण का पता इस तरह पूछती है जैसे त्रेतायुग मे श्रीराम जनकनंदनी के विरह में व्याकुल हो कर उनकी खोज कर रहे थे । गोपियों का वियोग शिकारी के बाण से घायल पपीहा पक्षी की तरह है, जो नदी का एक बूंद नही पीता वह स्वाती नक्षत्र के बूंद की तलाश में रहता है  । गोपियों के बार बार प्रार्थना पर श्रीकृष्ण सामने आते हैं । कथा व्यास भीष्म पितामह महाराज ने कहा कि प्रेम की पराकाष्ठा में जिस तरह बच्चों के लिए माता पिता, भरत के लिए श्रीराम है उसी तरह गोपियों के लिए श्रीकृष्ण है । कथा व्यास ने श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध की कथा को भी सुनाया । उक्त अवसर पर महंत हनुमान गढ़ी महेंद्र दास महाराज, यजमान गैंसड़ी विधायक शैलष कुमार सिंह ‘शैलू’, भाजपा मीडिया प्रभारी डी पी सिंह ‘बैस, सह मीडिया प्रभारी संदीप उपाध्याय, भानु प्रताप तिवारी, रवि श्रीवास्तव, रविंद्र गुप्ता सहित सैकड़ों श्रोतागण उपस्थित रहे ।
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