Monday, December 5, 2022
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कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की सूची बनाकर करें मदद : डीएम

परिजनों से मिलाकर उनके जीवन में लाएं खुशियां, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कराएं पहचान
जन एक्सप्रेस संवाददाता
कानपुर नगर। वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण काल में बहुत से ऐसे बच्चे हैं जिनके माता—पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। इसके साथ ही कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जिनके माता—पिता पॉजिटिव होने से होम आइसोलेशन में हंै और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे बच्चों की सूची बनाकर उनकी फौरन मदद की जाए तथा जो बच्चे गुमशुदा हो गये हैं उनको परिजनों से मिलाया जाए। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्र में उनकी पहचान कराई जाये। यह गुरुवार को बातें महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी के आदेश पर डीएम आलोक तिवारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कही।
कोरोना ने बहुत से परिवारों से उनकी खुशियां हमेशा-हमेशा के लिए छीन ली हैं, जिन परिवार में कल तक किलकारियां गूंजा करतीं थीं, आज उसी घर में बच्चे गुमशुम नजर आ रहे हैं। ऐसे ही बच्चों के जीवन में फिर से खुशियां लाने की हरसंभव कोशिश में सरकार जुटी है। जिन बच्चों ने कोरोना के चलते अपने माता-पिता को खोया है, उनकी चिंता सरकार को है और अब ऐसे बच्चों और परिवार की पहचान कर उन्हें हरसंभव मदद पहुंचाने की तरफ कदम बढ़ाया गया है । इसके अलावा ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता कोरोना को मात देने के लिए अस्पताल में भर्ती हैं या होम आइसोलेशन में हैं और बच्चे की देखभाल करने वाला परिवार में कोई नहीं है, उन बच्चों के संरक्षण पर भी पूरा ध्यान है ।
डीएम को आया पत्र
महिला एवं बाल विकास विभाग वी. हेकाली झिमोमी ने सूबे के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजते हुए कहा कि को कोविड-19 से प्रभावित/अनाथ हुए 18 साल से कम उम्र के बच्चों की पहचान कर सूची तैयार करने को कहा है। यह सूची 15 मई तक निदेशक, महिला कल्याण और राज्य बाल संरक्षण आयोग को भेजनी है ताकि ऐसे बच्चों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके। महिला कल्याण विभाग का कहना है कि इस सूची को तैयार करने में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में गठित निगरानी समितियों की मदद ली जा सकती है। इसके अलावा ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में गठित ग्राम बाल संरक्षण समितियों से भी इस सम्बन्ध में जानकारी जुटायी जा सकती है, जिसकी सदस्य सचिव आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होतीं हैं । इसके साथ ही विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन (1098) और जिला बाल संरक्षण इकाई भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए इस प्रकार के बच्चों के बारे में सूचनाएँ प्राप्त होने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी या बाल कल्याण समिति को तत्काल मुहैया कराएंगी । ऐसे बच्चों को 24 घंटे के अन्दर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, कोविड के चलते भौतिक प्रस्तुतीकरण के स्थान पर डिजिटल प्लेटफार्म का सहारा लिया जा सकता है। बच्चों की पहचान जुटाने और सूची तैयार करने में जनपद स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों की भी मदद ली जा सकती है।
हेल्पलाइन पर दें ऐसे बच्चों की सूचना
जिलाधिकारी ने कहा कि कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों या किसी एक को खो दिया है, उनके सम्बन्ध में सूचना कोई भी व्यक्ति चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नम्बर-1098 या महिला हेल्पलाइन-181 पर दे सकता है। ऐसे बच्चों को चाइल्ड लाइन 24 घंटे के अन्दर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। ऐसे बच्चों की सूचना राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के हेल्पलाइन- 011-23478250 पर भी दी जा सकती है।

 

 

 

 

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