Thursday, December 9, 2021
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‘मां पितांबरा’ पूर्ण करती हैं मनोकामना, दूर हो जाते हैं भक्तों के संकट

 

जन एक्सप्रेस। सनी राव मोघे
कानपुर नगर। बिठूर मंधना मार्ग पर स्थित मां बगलामुखी पितांबरा का मंदिर भक्तों और बिठूर जो कि ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व रखता है के लिए परम वरदान है। बिठूर मंधना मार्ग पर स्थित मां पितांबरा का मंदिर भक्तों के संकट दूर करता है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं वहां पहुंचने से ही पूर्ण हो जाती हैं।
मंदिर के संयोजक डॉक्टर सुनील शिव मंगल पांडे ने बताया कि मां पितांबरा ने उन्हें स्वप्न में आकर बिठूर मंधना मार्ग पर मंदिर निर्माण करने के लिए कहा था। जिसके बाद डॉ. सुनील शिव मंगल पांडे ने बिठूर में 3 साल पूर्व मंदिर का निर्माण कराया था जिसके लिए संयोजक स्वयं गंडक नदी से शालिग्राम लेकर आए थे और मंदिर में स्थापित किया है। बताते चलें कि गंडक नदी वह नदी है जहां का कडक़ड़ में भगवान का होना माना जाता है ऐसी मान्यता है कि वहां के कण-कण में भगवान बसे हैं जिसके बाद मंदिर में शिव प्रतिमा के लिए संयोजक मकराना से ढाई फीट का पत्थर लेकर आए थे जैसे शिल्पकार को शिवलिंग का आकार देना था लेकिन शिल्पकार को इस पत्थर पर कहीं भी छेनी नहीं चलानी पड़ी और आकृति शिवलिंग की बन गई मानो भगवान शंकर स्वयं शिवलिंग रूप में आने के लिए तैयार थे जिसके बाद मंदिर में वही शिव लिंग स्थापित भी की गई है।
मां पितांबरा दिन में तीन बार बदलती हैं अपना स्वरूप
मां पितांबरा मंदिर की एक और विशेषता है जहा गए भक्तों के दुख दूर कर उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं वही संयोजक डॉ सुनील शिव मंगल पांडे ने बताया कि मां अपना स्वरूप दिन में तीन बार बदलती हैं यहां तक की जब वह मां की मूर्ति लेने गए थे तब मां की दृष्टि सामने की ओर थी लेकिन कुछ ही समय बाद मां की दृष्टि एक तरफ हो गई जिसे देखकर डॉक्टर सुनील शिव मंगल पांडे अचंभित हो गए थे। इतना ही नहीं मंदिर के पुजारी अम्रा गुरु ने बताया कि पितांबरा मां दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती है और जितनी बार स्वरूप बदलती हैं उतनी बार माता की नजर मैं फर्क देखा जा सकता है। स्वरूप के साथ साथ मैया का देखने का नजरिया भी बदल जाता है।
वर्ष में दो बार होता है राष्ट्र रक्षा हवन
मा पितांबरा मंदिर में भक्तों की अर्जी के साथ-साथ देश की रक्षा के लिए भी अनुष्ठान किया जाता है जिसमें ब्राह्मण व संतो द्वारा राष्ट्र की रक्षा के लिए हवन किया जाता है जिसमें मां पितांबरा से प्रार्थना की जाती है की वह हमारे देश की रक्षा करें और देश पर कोई विपत्ति ना आ सके।
भंडारे द्वारा लोगों को मिला मां पितांबरा देविका प्रसाद
नवरात्र के अंतिम दिन मा पितांबरा देवी के मंदिर में सर्वप्रथम सुबह 8:00 बजे मां का अभिषेक किया गया और प्रात: 9:00 बजे मां की आरती की गई जिसके बाद प्रात: 10:00 मां सप्तशती चंडी का पाठ आरंभ किया गया जिसमें संपूर्ण महा सप्तशती के अध्याय आदि कर 9:00 बजे महा आरती हुई जिसके बाद मंदिर के बाहर ही प्रसाद स्वरूप हलवा चना पूरी का प्रसाद वितरित किया गया और भारी संख्या में भक्तों ने प्रसाद को ग्रहण किया।

 

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