मोदी के पास तो वक्त है लेकिन योगी के पास नहीं

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यू०पी० ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का सर्वेक्षण

  • सौरभ सिंह

मोदी के पास तो वक्त है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास बमुश्किल 8 महीने का समय अपना इम्तिहान पास करने के लिए है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी अभी बहुत ज्यादा हड़बड़ी में नहीं है क्योंकि वह जानते हैं कि उनके पास करतब दिखाने के लिए अभी काफी समय है। इसके अलावा हाल में अभी जो सर्वे आए हैं वे बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की छवि कोरोना काल में भी बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है। इन दोनों सर्वे में से एक सर्वे भारतीय एजेन्सी सी वोटर का भी है। जिसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री के परफॉर्मेंस से बहुत संतुष्ट लोगों का प्रतिशत 65 से गिरकर 37 पर आ गया है। दूसरा सर्वे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय डाटा इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट ने किया है उसमें बताया गया है कि मोदी की अपूर्वल रेटिंग अभी भी 63 प्रतिशत है।

इससे इस बात के पूरे संकेत मिलते हैं कि आने वाले 3 वर्षों में अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो मोदी की लोकप्रियता एक बार फिर चरम पर पहुंच सकती है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिनको चाहने वालों की संख्या में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की परफॉर्मेंस से 30 प्रतिशत लोग नाखुश हैं कोरोना के पहले कालखंड में उत्तर प्रदेश सरकार की रेटिंग में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई थी लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने भाजपा तथा योगी दोनों को कमजोर किया है।

यू०पी० ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन द्वारा 27 अप्रैल से 27 मई के बीच जो सर्वे कराया गया है इसमें भाजपा सरकार पर तमाम तरह के आरोप लगाए गए हैं और इसमें सबसे प्रमुख है भ्रष्टाचार। सर्वे के दौरान शहरी तथा ग्रामीण दोनों मतदाताओं ने कहा है कि वर्तमान योगी सरकार किसी भी तरह से अखिलेश यादव सरकार से बेहतर नहीं है। मतदाताओं का कहना था कि अखिलेश सरकार में जो काम 1000 देकर हो जाता था वह इस सरकार में 3000 में भी नहीं हो पाता है।

भाजपा समर्थक कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे 4 साल में किसी का भी एक काम नहीं करवा पाए जबकि विपक्ष के लोगों ने पैसा खर्च करके काम करवा लिए। सर्वे के दौरान सबसे अधिक शिकायतें भाजपा के ही समर्थकों में थी। क्योंकि उनकी कोई सुनने वाला नहीं था। प्रदेश में मतदाताओं ने योगी को 100 में से केवल पासिंग मार्क यानी 35 नंबर दिए और कहा कि अभी तकरीबन 8 महीने का समय है लेकिन लगता नहीं की योगी कुछ कर पाएंगे। टीकाकरण की बाबत पूछे गए कई सवालों के जवाब में मतदाताओं ने कहा कि जो तेजी मई के तीसरे सप्ताह में प्रारंभ हुई है यदि मार्च के अंतिम सप्ताह में ही प्रारंभ हो जाती तो इतने लोग शायद ना मरते ? उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय चुनाव को लेकर लोगों में बेशुमार गुस्सा सर्वे के दौरान देखने को मिला उनके अनुसार कोरोना का प्रकोप सबसे ज्यादा उसी समय बड़ा था। यह पूछने पर कि मोदी को 100 में से कितने नंबर मिल सकते हैं, 62 प्रतिशत मतदाताओं का कहना था कि 70 प्रतिशत से कम नहीं मिलेंगे।

लेकिन योगी नाम लेते ही उनके प्रतिशत का ग्राफ 25 तक पहुंच जाता था। सर्वे के दौरान भाजपा के ही कुछ समर्थक तथा कार्यकर्ताओं का कहना था कि 2022 में उत्तर प्रदेश में भाजपा का हारना जरूरी है क्योंकि योगी अचानक से प्रधानमंत्री की कुर्सी को देखने लगे हैं जो अभी असंभव है। ठाकुर वाद की बावत पूछे गए सवाल के जवाब में योगी की अपेक्षा राजनाथ सिंह को काफी बेहतर माना। सर्वे के दौरान एक बात सबसे ज्यादा बार और सबसे ज्यादा स्थानों पर कही गई वह थी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा तथा नौकरशाही को बढ़ावा 4 दर्जन विधायकों ने सर्वे के दौरान नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांव की वास्तविक तस्वीर प्रधान और विधायक जानता है या फिर योगी के नवरत्न। सर्वे के दौरान समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी को भाजपा का विकल्प मानने से लोगों ने इनकार किया लेकिन इतना जरूर कहा कि यदि आज कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल होता तो 2022 में कांग्रेस की सरकार बनना तय था।

खैर जो भी हो अभी कोई भी अनुमान लगा पाना मुश्किल है लेकिन इतना तय है कि योगी की नइया इतनी आसानी से इस बार पार लगने वाली नहीं क्योंकि मतदाताओं का मूड इस बार जिस तरह का बन रहा है उसमें त्रिशंकु विधान सभा की संभावना ज्यादा है। वैसे भी उत्तर प्रदेश में योगी का कमजोर होना या सत्ता न प्राप्त कर पाना मोदी के लिए फायदेमंद ही है। सर्वे के दौरान पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में जहां केशव प्रसाद मौर्य का ग्राफ बुलंदी पर है वही ब्राह्मण उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को 100 में से 10 नंबर भी देने को तैयार नहीं जबकि न्याय मंत्री बृजेश पाठक को 100 में से 65 नंबर मिलते दिखे।

 

(लेखक, उत्तर प्रदेश ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव हैं)


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