Sunday, December 4, 2022
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नीलांश वाटर पार्क के लिए मोड़ दी मां गोमती की धारा

आला आईएएस अफसरों का काला धन लगा है वाटर पार्क में!

  • 2007 से आज तक बसपा, सपा और भाजपा तीनों की सरकार रही, नहीं हुई कोई कार्रवाई

  • सैकड़ों बीघा जमीन का है मामला, इसमें गरीब किसानों की जमीन भी शामिल

  • मुख्यमंत्री तक से हो चुकी है व्यक्तिगत शिकायत, गलत रिपोर्ट भेज कर मुख्यमंत्री कार्यालय को गुमराह कर रहे अधिकारी

जन एक्सप्रेस। डॉ.वैभव शर्मा
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में नीलांश वाटर पार्क बनाने के लिए नियम, कानून, पर्यावरण, संवेदनाएं सब को किनारे कर दिया गया। 2007 से 2022 यानि अभी तक बसपा, सपा और भाजपा तीनों राजनीतिक दलों की सरकारें रही हैं। करीब 500 बीघे से अधिक में बने इस वाटर पार्क में कई किसानों के साथ ही सरकार की भूमि भी है। अपनी जमीन नीलांश वाटर पार्क से कब्जामुक्त कराने की किसानों की लगातार शिकायत के बावजूद अभी तक किसी सरकार का दिल नहीं पसीजा है। समाजसेवी दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज इस मुद्दे को लगातार जिम्मेदारों तक पहुंचा रहे हैं। इस मामले में पिछले दिनों वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिल चुके हैं। सीएम ऑफिस से जब- जब पूछताछ होती है, सरकारी अमला गलत रिपोर्ट लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करता रहा है। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि नीलांश वाटर वार्क के मालिक तो रसूखदार हैं ही, वाटर पार्क में यूपी के तमाम बड़े आईएएस अफसरों का भी काला धन लगा हुआ है।

योगी जी, क्या अफसरों के सामने बौनी है आपकी एंटी भूमाफिया स्क्वाएड


नीलांश वाटर पार्क ने सीएम योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार की कथनी और करनी पर सवाल उठा दिए हैं। भूमाफिया और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बातें खोखली साबित हो रही हैं। कारण कि बड़े-बड़े भूमाफियाओं को तो योगी सरकार ने कानून और बुलडोजर की भाषा में सबक सिखा दिया लेकिन ऐसे भूमाफिया जो आला अफसरों के संरक्षण में कब्जा करा रहे हैं उन पर कार्रवाई का कोई प्लान सरकार के पास नहीं दिखता।

औरों से उम्मीद नहीं थी, भाजपा की सरकार बनी तो मैंने मुद्दा उठाया: तिरंगा महाराज

तिरंगा महाराज से जब जन एक्सप्रेस द्वारा पूछा गया कि अत्याचार तो 2007 से हो रहा था फिर उन्होंने वर्षों बाद किसानों की आवाज क्यों उठाना शुरू की। इस पर तिरंगा महाराज ने कहा कि किसानों और मां गोमती पर अत्याचार तो 2007 में ही शुरू हो गया था। तब बसपा की सरकार थी, इसके बाद सपा सरकार में भी सब जारी रहा। जब भाजपा सरकार सत्ता में आई तो उन्हें लगा कि अब आवाज बुलंद की जाए, सुनवाई जरूर होगी। लेकिन अभी सफलता हाथ नहीं लगी है। भूमाफिया और अफसरों का गठजोड़ किसानों और गोमती की धारा पर भारी पड़ रहा है। तिरंगा महाराज ने बताया कि वह खुद भाजपा के कार्यकर्ता हैं लेकिन किसानों और गोमती का हित बड़ा मुद्दा है।

आला आईएएस अफसरों का खौफ इतना कि नाम नहीं खोलते तिरंगा महाराज

किसानों और गोमती के हक में आवाज उठा रहे तिरंगा महाराज खुलकर भूमाफियाओं और सरकारों को कोसते हैं। नीलांश वाटर पार्क के मालिकों का नाम खुलेआम लेकर शिकायत करते हैं। इनसे आलाधिकारियों की सांठगांठ की बात भी बार-बार करते हैं लेकिन किसी आला आईएएस अधिकारी का नाम खुलकर नहीं बोलते। सूत्रों के अनुसार उन्हें डर है कि अगर उन्होंने आईएएस अधिकारियों का नाम खोला तो उन्हें झूठे मुकदमों में फंसा कर जेल में डाल दिया जाएगा।

अफसरों की संपत्ति पर बुलडोजर चलाए कौन

जिन आईएएस अफसरों की काली कमाई का मोटा हिस्सा नीलांश वाटर पार्क में लगा है उनमें से ज्यादातर अभी भी सूबे के प्रमुख ओहदों पर बैठे हैं। यही कारण है कि तहसीलदार, एसडीएम से लेकर डीएम, कमिश्नर तक वाटर पार्क पर कोई हाथ नहीं डाल रहा। किसी अफसर ने अंदर फार्म हाउस बनवा रखा है तो किसी ने आलीशान रेस्ट हाउस, कई ने अप्रत्यक्ष रूप से अपनी काली कमाई का निवेश वाटर पार्क के पार्टनर के रूप में किया हुआ है। सरकारी मशीनरी द्वारा वाटर पार्क पर बुलडोजर चला तो दरअसल यह बुलडोजर शासन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले अफसरों की संपत्ति पर ही चलेगा। आश्चर्य में डालने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ अफसर हर सरकार में मजबूत स्थिति में रहे हैं। इन अफसरों के आपसी हित और संरक्षण की वजह से कोई कार्रवाई अमल में नहीं आई है।

बाउंड्रीवाल लगाकर गोमती की धारा को भी मोड़ा

किसानों की भूमि नीलांश वाटर पार्क के कब्जे से मुक्त कराने और गोमती नदी को उसका मूल स्वरूप वापस दिलाने के लिए 95 दिनों से धरने पर बैठे दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज ने जन एक्सप्रेस को बताया कि रसूख के चलते रिजॉर्ट के प्रत्यक्ष मालिक और भूमाफिया सतीश श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, मदनलाल ने सरकार में ऊंचे स्तर तक सेटिंग कर न सिर्फ किसानों की जमीन पर कब्जा किया है, बाउंड्रीवाल लगाकर गोमती की धारा को भी मोड़ दिया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंचा मामला

तिरंगा महाराज ने बताया कि उन्होंने मलिहाबाद और बीकेटी के एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी लखनऊ, मंडलायुक्त, विधायक, सांसद कौशल किशोर, सांसद और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इस बड़े घोटाले की शिकायत की। यही नहीं, जीवनदायिनी और पर्यावरण के लिए अति आवश्यक गोमती नदी का अस्तित्व बचाने के लिए एनजीटी में भी शिकायत की। वहां शिकायत का संज्ञान भी लिया गया। क्योंकि हर जांच और कार्रवाई के निर्देश स्थानीय प्रशासन के पास आते हैं, इसलिए कोई जमीनी कार्रवाई नहीं हुई।

धरने को हुए 95 दिन

मलिहाबाद के टिकरीकलां क्षेत्र में किसानों की जमीन और गामती नदी के हिस्से पर किथत रूप से कब्जा कर बनाए गए नीलांश वाटर पार्क के विरोध में दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा बाबा लगातार धरने पर बैठे हैं। उन्हें पीडि़त किसानों के साथ धरना देते हुए 95 दिन हो गए हैं। तिरंगा बाबा के अनुसार अभी तक किसी अधिकारी की नींद नहीं टूटी है। लेकिन जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा उनका धरना जारी रहेगा।

पीडि़तों का दर्द: सीएम योगी जी, भूमाफियाओं से कम, उन्हें संरक्षण देने वाले आपके अफसरों से ज्यादा डर लगता है

अगर आपके पास भी नीलांश से जुड़ी कोई जानकारी हो तो उसे जन एक्सप्रेस के व्हाट्सएप नंबर 8933805555
पर साझा करें, आप द्वारा दी गई सूचना गुप्त रखी जाएगी।

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