पीर रतन नाथ की शोभा यात्रा देवीपाटन पहुंचने पर किया गया भव्य स्वागत

उत्तर प्रदेश
सच दिखाने की जिद...

भारतीय क्षेत्र में पहुंचने पर शोभायात्रा में शामिल संतो का किया गया कार्बेट परीक्षण
नेपाल से सैकड़ों किलोमीटर चलकर नवरात्रि की पंचमी को देवीपाटन पहुंचती है शोभा यात्रा
भारत नेपाल के मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूती प्रदान करती है यह यात्रा

तुलसीपुर / बलरामपुर । जनपद बलरामपुर के तहसील तुलसीपुर मुख्यालय पर मां पाटेश्वरी की जय रत्न नाथ बाबा की जय जैसे उद्घघोषो से पृथ्वी सहित आकाश की शून्यता को तोड़ते तथा उदयाचल से निकलते हुए सूर्य की लालिमा का तेज जिस प्रकार अपने अश्व रथ पर आगे बढ़ रहा था उसी उत्साह के साथ भक्त भी आतुरता के साथ पीर रत्न नाथ की शोभा यात्रा की प्रतीक्षा में खड़े थे। नवरात्र की पंचमी तिथि पर तुलसीपुर शक्तिपीठ देवी में पहुँची रत्न नाथ की पदयात्रा का स्वागत देवी पाटन मंदिर पीठ के पीठाधीश्वर महन्त मिथलेश नाथ योगी ने किया।
            जानकारी के अनुसार भारत और नेपाल के बीच प्रगाढ़ संबंधों को मजबूती प्रदान करने वाली पीर रत्न की शोभा यात्रा जो पड़ोसी देश नेपाल राष्ट्र के दांग चौघड़ा से चलकर लमही के रास्ते सैकड़ों किलो मीटर की पदयात्रा करते हुए लगभग दो सप्ताह के समय में शोभा यात्रा सकुशल तुलसीपुर के शक्ति पीठ देवीपाटन पहुंच गई। रत्ननाथ की शोभा यात्रा के स्वागत के लिए भक्त सुबह से प्रतीक्षारत दिखाई पड़े । बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे नव जवान सभी रत्ननाथ पात्र देवता की झलक पाने को आतुर दिखाई पड़े रहे थे। पड़ोसी देश नेपाल से चलकर तुलसीपुर में प्रवेश करते ही भक्तों ने प्रातःकाल नकटी नाले के समीप स्थित कुटिया पर रत्ननाथ की शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। भक्तों की भारी भीड़  रत्न नाथ बाबा के स्वागत एवं दर्शन के लिए उमड़ी थी। शोभा यात्रा मिल चुंगी नाक, पुरानी बाजार चौक, हनुमान गढ़ी चौराहा, हरैया चौराहा होते हुए देवीपाटन मंदिर  स्तिथ समय माता के स्थान पर पहुंची।
शक्तिपीठ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नाथ योगी सहित हिंदू महासंघ के विजय सिंह, प्रवीण सिंह विक्की, मंदिर सेवादार अरुन कुमार गुप्ता, श्याम तिवारी, गोल्डी पाल सहित सैकड़ों भक्तों के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया। शोभा यात्रा के साथ आए साधु संतो को माला पहनाकर उनका अभिवादन किया। जिसके पश्चात पीर रतन नाथ के साथ आए संत मां पाटेश्वरी मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचे तथा मां पाटेश्वरी पूजन अर्चन किया। देवीपाटन पीठ के पीठाधीश्वर मिथलेश नाथ योगी ने बताया कि  नेपाल के दांग चोघड़ा मठ में स्थापित रत्ननाथ को भी देवी पाटन में ही सिद्धि  प्राप्त हुई थी। गुरु गोरक्षनाथ के शिष्य रत्ननाथ ने देवी पाटन मठ पर ही माँ दुर्गा की तपस्या की थी। रत्ननाथ की तपस्या से खुश होकर मां ने साक्षात दर्शन दिया तथा वर मांगने को कहा तो रत्ननाथ ने वर मांगा कि देवीपाटन मठ में  उनकी भी पूजा हो। मां  ने उनको ऐसे ही वर का आशीर्वाद दिया। तब से प्रत्येक वर्ष बसंतीय नवरात्रि की पंचमी तिथि को देवीपाटन मंदिर में नेपाल से पदयात्रा करते हुए रत्ननाथ की शोभायात्रा आती है तथा अगले पांच दिन तक नेपाल से आये पुजारियों द्वारा मां पाटेश्वरी के साथ-साथ रत्ननाथ की पूजा की जाती है। ऐसा  वृतांत देवीपाटन का  इतिहास नामक पुस्तक में भी मिलता है। देवीपाटन स्तिथ दरीचे में नेपाल से आए रत्ननाथ पात्र देवता को स्थापित किया जाता है। इस अवसर पर मंदिर में घंटे घड़ियाल नगाड़े आदि नही बजाये जाते हैं। भारत और नेपाल के हजारों श्रद्धालु इस पूजा को देखने तथा आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर देवीपाटन आते है। रत्न नाथ की शोभा यात्रा का वृतांत कई सौ सालों का है। युगों युगों से चली आ रही परम्परा को बीते साल कोविड 19 ने शोभा यात्रा के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। कोरोना महामारी के चलते रत्ननाथ की शोभा यात्रा 2020 में नही आ पाई थी। जिला चिकित्साधिकारी वी. बी.सिंह ने बताया कि शोभायात्रा के साथ आए पुजारियों का कोविड 19 की जाँच एक दिन पहले जनकपुर पहुँचने पर किया गया। इसके बाद शोभा यात्रा को देवी पाटन के लिए प्रस्थान कराया गया।

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