राष्ट्रपति का कानपुर दौरा: वी. वी.आई.पी. प्रोटोकॉल बना महिला की मौत का कारण, घटना के असल जिम्मेदार मंडलायुक्त, डीएम, पुलिस कमिश्नर सहित अन्य जिम्मेदार दें इस्तीफा

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जन एक्सप्रेस/कमलेश फाइटर

कानपुर नगर। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कानपुर आगमन पर यातायात रोके जाने के कारण जाम में फंस कर महिला उद्यमी वंदना मिश्रा की मौत होने के कारण कानपुर नगर के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा किए गए बड़े-बड़े वादों को पोल खुल कर सामने आ गई। राष्ट्रपति के आगमन पर हुई इस मौत ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है विदेशों में भी राष्ट्रपति के आगमन पर रोका गया यातायात, जाम में घंटो फंसी रहने से हुई मौत कहीं ना कहीं हमारे देश की फजीहत हो रही है। कानपुर नगर के जिला प्रशासन में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों ने एक दरोगा सहित तीन कॉन्स्टेबल को निलंबित कर खुद को सुरक्षित मान लिया है, जबकि आपको बता दें वह सिर्फ और सिवरिष्ठ अधिकारियों का फेलियर था जिस कारण उद्यमी महिला की मौत हुई है। और इन अधिकारियों को अपनी नैतिक जिम्मेदारीर्फ मानते हुए तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

राष्ट्रपति के आगमन पर यातायात की वैकल्पित व्यवस्था न होने से बीमार वंदना को कई घंटे तक परिजन जाम से कार को निकालने के लिए फड़फड़ाते रहे और किसी तरह से निकलकर जब अस्पताल पहुंचे तो काफी देर हो चुकी थी। मीडिया के माध्यम से खबर की जब राष्ट्रपति को जानकारी हुई तो उन्होंने | खेद व्यक्त किया और जिलाधिकारी से फौरन बात की। वहीं पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने उनके घर जाकर माफी मांगी और साथ अपने ट्वीटर एकाउंट पर भी माफी मांगते हुए लिखा अब दोबारा से ऐसी गलती नहीं होगी। | कमिश्नर ऑफ पुलिस कानपुर नगर असीम अरुण के माफी मांग लेने मात्र से क्या अब महिला उद्यमी वापस आ जाएंगी? ज्ञातव्य हो कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपनी चार दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को अपने शहर कानपुर आये | उनकी यात्रा के दौरान देर शाम किदवई नगर के-ब्लाक निवासिनी महिला उद्यमी वंदना मिश्रा की दोबारा अचानक तबीयत खराब हो गयी और परिजन कार से रीजेंसी अस्पताल ला रहे थे। रीजेंसी अस्पताल से पहले जब उनकी कार गोविन्दपुरी पुल पर पहुंची तो राष्ट्रपति के शहर आगमन पर यातायात रोक दिया गया। पति शरद मिश्रा ने बताया कि | ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मियों से बहुत मिन्नतें की गईं पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। बताया कि इस दौरान बराबर वंदना उल्टियां करती रहीं और | जब करीब एक घंटे बाद यातायात चालू हुआ तो अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बताया कि पहले वह कोरोना संक्रमित हो चुकी थीं और बाद में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी, लेकिन उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी। इस पर शुक्रवार को ही रीजेंसी अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया था और जब दोबारा फिर तबीयत खराब हुई तो फिर से कार द्वारा अपने घर से रीजेंसी अस्पताल आ रहे थे।

राष्ट्रपति ने व्यक्त किया खेद, पुलिस कमिश्नर ने मांगी माफी


महिला उद्यमी वदना मिश्रा की मैत की खबर शनिवार सुबह समाचार पत्र में जब महमस्मि को पत्नी सविता कोविंद को हुई तो उन्होंने फौरन जानकारी राष्ट्रपति को दी। राष्ट्रपति ने तत्काल जिलाधिकारी आलोक तिवारी को बुलाकर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वंदना के घर जाकर परिजनों को हॉइस बंधाया जाये। इस पर जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर असीम अरुण पुलिस अधिकारियों के साथ शरद मिश्रा के घर पहुंचे और राष्ट्रपति का शोक संदेश पहुंचाया। पुलिस कमिश्नर ने माफी मानते हुए कहा कि इसको यतिपूर्ति तो नहीं हो सकती है, लेकिन हमारी कोशिश होगी कि ऐसी घटना की पुनरावृति न हो। यही नहीं पुलिस कमिश्नर अधिकृत ट्विटर अकाउंट पर माफी भी नगी उन्होंने लिखा, आईआईए की अध्यक्ष बहन चंदना मिश्रा के वन के लिए कानपुर नगर पुलिस और व्यक्तिगत रूप से मैं थमा का प्रार्थी हूँ। भनिय के लिए यह बड़ा सबक है। हम प्रण करते हैं कि हमारी रूट व्यवस्था ऐसी होगी कि न्यूनतम समय के लिए नागरिकों को रोका जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो। बताते पले राष्ट्रपति पत्नी सन सर्किट हाउस में ठहरे हुए है और शहर के पुनिय लोगों व पुराने दोस्तों से शनिवार को मिल रहे थे।

सिक्योरिटी अरेंजमेंट फार वेरी इम्पोटेंट पर्सन एक्ट के अंतर्गत होना चाहिए था रूट डायवर्जन का खाका तैयार

राष्ट्रपति के आगमन पर उनकी सुरक्षा के लिए रूट डायवर्जन किया जाना नितांत आवश्यक था परंतु हम आपको बता दें कि सिक्यूरिटी अरेंजमेंट फार वेरी इम्पोर्टेंट पर्सन एक्ट के अंतर्गत होना चाहिए था। रूट डायवर्जन के दौरान जैसे वीवीआईपी के लिए एक इमरजेंसी रूट तैयार रखा जाता है वैसे ही सामान्य नागरिकों के लिए भी ऐसी ही एक व्यवस्था की जानी चाहिए थी अगर ऐसी व्यवस्था की जाती तो शत प्रतिशत महिला उद्यमी की जान बच सकती थी और एक्ट में इसका प्रावधान भी है कि जिस समय भी शहर में वीवीआईपी आएंगे उस समय नागरिकों के लिए भी एक आकस्मिक मार्ग तैयार करने की जिम्मेदारी जिले के वरिष्ट्ठ अधिकारियों की होती है जो अधिकारियों के द्वारा नहीं की गई इसलिए जो जिले के जिम्मेदार अधिकारी जैसे मंडलायुक्त डीएम पुलिस कमिश्नर एवं अन्य जिम्मेदारों को तत्काल इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।


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