प्रसंग वश : तो क्या रामदेव की मौत नहीं होगी ?

टॉप न्यूज़ देश राजनीति राष्ट्रीय लेख
सच दिखाने की जिद...

-डॉ0 ओ.पी. मिश्र

एक सफल प्रोफेशनल एक व्यापारी है और खुद के लिए काम करता है जब तक ऐसी भावना उसके अंदर नहीं आएगी, वह कभी सफल नहीं हो पाएगा। सही सवाल यह है कि अगर आप अपने लिए काम नहीं करते हैं तो आप किसके लिए काम करते हैं? स्वतंत्र अर्थव्यवस्था यह जब तक बिजी नहीं होगी तब तक कुछ नहीं होता है। शायद इसी फार्मूले पर आज के सफल विजेता व कल के योगगुरु स्वामी रामदेव चल रहे है। वह यह बात भली-भांति जानते हैं कि कब और कैसे कोई प्रोडक्ट बेचा जा सकता है, क्योंकि दुनिया नतीजों को इनाम देती है। कोशिशों को नहीं, और स्वामी रामदेव आज धड़ल्ले से न केवल सब कुछ बेच रहे हैं बल्कि इनाम भी पा रहे हैं। इसे अगर में दूसरे शब्दों में कहूं तो स्वामी रामदेव एक सफल सेल्समैन है क्योंकि वह न केवल प्रोडक्ट बेच रहे हैं बल्कि सर्विस और विचार भी बेच रहे हैं। एक ऐसा विचार जिसको मानने वाले करोड़ों लोग हैं और यही उनकी वह ताकत है जिसकी बिना पर वह अनाप-शनाप बोलते रहते हैं। क्योंकि वह जानते हैं कि राजनीतिक दलों को वोट बैंक चाहिए और उनके पास वोट बैंक है इसी वोट बैंक के कारण आज भाजपा के तमाम समर्थक लोग उनकी हा मे हा मिलाने को मजबूर है। कहा जाता है कि ‘ब्रह्मवाक्य जनार्दनः’ लेकिन आज यह श्लोक बदल चुका है आज रामदेव जी जो कहते हैं और बोलते हैं शायद वही ब्रहावाक्य है। इधर कुछ दिनों में स्वामी रामदेव एलोपैथी और होम्योपैथी के डॉक्टरों को लेकर बहुत ज्यादा आक्रमक है वे यह कहते घूम रहे है कि यह कैसी पद्धति है जो अपने डॉक्टरों को नहीं बचा पा रही है। उनके अनुसार कोरोना कालखंड में लाखों मरीजों की मौत एलोपैथी दवाओं के चलते हुई है, इसके अलावा यदि एलोपैथी इतनी ही ताकतवर और सर्वगुण संपन क्षमता पर न केवल हॅसी आ रही है, बल्कि मैं यह भी सोचने को मजबूर हूं कि क्या वे दिमाग से अंधे है ? क्योंकि जीवन-मृत्यु मानव के हाथ में नहीं है। हो सकता है स्वामी रामदेव के हाथों में हो और अगर उनके हाथ में होगी तो यह भी तय है कि उनकी मृत्यु नहीं होगी। शायद ब्रह्मा जी ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया हो। दरअसल स्वामी जी ने एलोपैथी को लेकर जो बयान दिया है वह बिल्कुल उसी तरह का है जैसे उन्होंने स्वदेशी बनाम राष्ट्रीय कंपनियों को लेकर दिया था। स्वामी जी का उक्त बयान उनके व्यापार व अपनी दवाओं की मार्केटिंग का ही एक हिस्सा है।

एलोपैथी को लेकर उनके मन में जो खटास है उसका कारण है कि 135 करोड़ आबादी वाले देश भारत में 95 करोड़ से अधिक लोग एलोपैथी दवा को आयुर्वेद के मुकाबले ज्यादा लाभकारी मानते हैं और उस पर विश्वास करते हैं, न कि बाबा जी की कोरोनिल को वैसे, हमारे देश में अंधभक्तों की कमी नहीं है यही कारण रहा कि बाबा जी के अनुयायियों ने 500 करोड़ की कोरोनिल कोरोना वायरस से बचने के लिए खरीदी है। मतलब साफ है कि स्वामी रामदेव एक सफल प्रोफेशनल सेल्समैन के रूप में कामयाब रहे। एलोपैथी को लेकर स्वामी रामदेव जो विषवमन कर रहे हैं उसका मूल कारण है कोरोना मेडिसिन पैकेज में कोरोनिल को ना शामिल करना । आज अगर स्वामी रामदेव फार्मा कंपनियों से यह पूँछ रहे हैं कि क्या आपके पास थायराइड, कोलाइटिस और अस्थमा जैसी बीमारियों का स्थाई इलाज है तो इसके पीछे उनकी सोची-समझी रणनीति है जिसके जरिए वे न केवल भक्तों को बल्कि आम आदमी को भी यह बताना चाहते हैं कि उनके पास इन बीमारियों का स्थाई इलाज है। अब क्योंकि उनको और उनकी पतंजलि को केंद्र सरकार तथा राज्य की भाजपा सरकारों का समर्थन प्राप्त है इसलिए वह किसी से भी कुछ पूँछ सकते हैं, सवाल कर सकते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि जब तक भाजपा की सरकार है, तब तक उन्हें महिलाओं के कपड़े पहन कर भागना नहीं पड़ेगा। वैसे, ऐसा नहीं है कि उन्हें केवल भाजपा का ही समर्थन प्राप्त है क्योंकि पतंजलि मुख्यालय के स्वागत कक्ष में जो शिलापट लगा है, उसमें कमोवेष सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं का नाम अंकित है। जिस तरह एक सफल व्यापारी अपनी दुकान पर महान हस्तियों के साथ अपनी फोटो खिंचवाकर लगवाता है। वही काम योग से सेल्स के क्षेत्र में आए स्वामी रामदेव ने किया है। एलोपैथी की आलोचना करने वाले रामदेव यह भूल जाते हैं कि आजादी के समय देशवासियों की औसत आयु 31 वर्ष थी, वह अब अगर बढ़कर 70 वर्ष हो गई है तो वह मॉडर्न मेडिकल साइंस की ही बदौलत हुई है, इसी मॉडर्न साइंस की बदौलत आज तमाम घातक बीमारियों का अस्तित्व समाप्त हुआ है। रामदेव जैसे लोग जब इस तरह का बयान देते हैं तो लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। जिसका खामियाजा अंत में आम आदमी को ही भुगतना पड़ता है। राजनीतिक दलों को भी इस तरह के गैर जिम्मेदार तथा टीके पर सियासत वाले बयानों से बचना चाहिए क्योंकि भक्त तो आपकी बात सुनकर टीका लगवाएगा नहीं जबकि बयान देने वाला लगवा लेगा।

 

…….लेखक हिंदी दैनिक जन एक्सप्रेस समाचार पत्र के संपादक हैं।


सच दिखाने की जिद...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *