Friday, December 9, 2022
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व्यापारी समाज को प्रकाश देने वाला सूर्य हुआ अस्त

पूर्व भाजपा सांसद श्याम बिहारी मिश्र के निधन की खबर से शोकमय हुआ वातावरण
जन एक्सप्रेस संवाददाता
कानपुर नगर। वैश्विक महामारी कोरोना का संक्रमण जनपद में तेजी से बढ़ रहा है और लोग रोजाना चपेट में आ रहे हैं। मंगलवार को दूसरे पहर व्यापारी समाज को प्रकाश देने वाले व चार बार के भाजपा से सांसद रहे 94 वर्षीय श्याम बिहारी मिश्रा का भी सूर्य सदैव के लिए अस्त हो गया। इससे व्यापारी समाज और शहरवासियों में शोक की लहर डूब गयी और खासकर मिश्रा परिवार में, क्योंकि सुबह ही उनके भतीजे व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री हनुमान मिश्रा का भी निधन हो गया था। हालांकि हनुमान मिश्रा का निधन कोरोना की जगह किडनी संक्रमण से हुआ था, लेकिन एक ही दिन में चाचा भतीजे की मौत से परिवार में दुखों का पहाड़ टूटने से कम नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम बिहारी मिश्रा बिल्हौर लोकसभा सीट से 1991 से लगातार चार बार सांसद रहे। सांसद के तौर पर शहर में उनकी ख्याति तो थी ही साथ ही व्यापार जगत में उनकी जो साख थी वह शायद राजनीति से कम नहीं थी। उम्र को बाधा न मानते हुए सदैव व्यापारियों के हितों के लिए खड़े रहते थे। कोरोना काल में भी व्यापारियों के साथ उनकी बैठकें बराबर होती रहीं और खुद कोरोना की चपेट में आ गये। कोरोना पॉजिटिव होने पर परिजनों ने शहर के एक निजी अस्पताल में उनको भर्ती कराया था जहां पर इलाज के दौरान मंगलवार को निधन हो गया। पूर्व सांसद के निधन की सूचना पर उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ पड़ी तो वहीं व्यापारी समाज भी रोशनी दिखाने वाले अपने नेता के अस्त होने पर स्तब्ध है।

भतीजे की नहीं ठंढी हुई राख
पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्रा के निधन से पहले आज ही सुबह उनके भतीजे व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री हनुमान मिश्रा का निधन बीमारी के चलते हो गया था। परिजन हनुमान मिश्रा का अंतिम संस्कार भैरव घाट में किये और शायद अभी उनकी चिता की राख ठंढी भी नहीं हुई होगी कि चाचा श्याम बिहारी मिश्रा का भी निधन हो गया। सूर्य ढलने से पहले एक ही दिन में भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे चाचा भतीजे के निधन पर परिवार के लोगों की आवाजें रुक सी गई हैं।

दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हनुमान मिश्र के निधन पर सीएम ने व्यक्त किया शोक

कानपुर नगर। पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्रा के भतीजे व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री 55 वर्षीय हनुमान मिश्रा का निधन हो गया। दुखद समाचार सुनते ही करीबियों का उनके आवास पर जमावड़ा लगने लगा और अपने नेता के अलविदा होने से दुख व्यक्त कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने शोक व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ की। बताया जा रहा है कि उनका पार्थिव शरीर लखनऊ से आ रहा है और कोविड नियमों का पालन कर भैरव घाट में अंतिम संस्कार होगा।
उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड के सभापति व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री हनुमान मिश्र का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह लखनऊ के पीजीआई में भर्ती थे जहां पर उनका किडनी संक्रमण को लेकर इलाज चल रहा था। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही भाजपा परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। हनुमान मिश्रा के देहांत की खबर मिलते ही कानपुर के भाजपा कार्यालय में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पार्टी के कई बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता कोविड नियमों का पालन करते हुए उनके आवास पर पहुंचे हैं। एबीवीपी के कार्यकर्ता ऋतुराज मिश्रा ने बताया कि अभी उनका पार्थिव शरीर लखनऊ से नहीं आया है, पार्थिव शरीर आने के बाद कुछ देर के लिए आवास पर दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद भैरव घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। बताया कि उनके परिवार में पत्नी अपर्णा मिश्रा, बेटा अविरल मिश्रा, बेटी सौम्या और छवि हैं। बेटा एलएलबी का छात्र है।
एबीवीपी से की शुरुआत
दर्जा प्राप्त मंत्री हनुमान मिश्रा मूल रुप से कानपुर के आचार्य नगर के रहने वाले थे। उनके चाचा व व्यापारी नेता श्याम बिहारी मिश्रा बिल्हौर लोकसभा सीट से लगातार तीन बार सांसद रह चुके हैं। चाचा के पद चिन्हों पर चलकर हनुमान मिश्रा अपने कैरियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से की थी। एबीवीपी में प्रांत मंत्री रहते हुए संगठन में बेहतर कार्य होने के चलते भाजपा में उन्हे क्षेत्रीय मंत्री बनाया गया और लगातार सात बार इस पद पर रहे। इसके बाद क्षेत्रीय मंहामंत्री और युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं। संगठन की जिम्मेदारी संभालने के बाद पार्टी ने उन पर दो बार 2007 और 2012 में सीसामऊ विधानसभा से उम्मीदवार भी बनाया और टक्करी चुनाव लड़ा। 2017 में भी उन्होंने दावेदारी की थी, पर तत्कालीन प्रदेश मंत्री सुरेश अवस्थी पर पार्टी ने दांव लगा दिया, हालांकि वह भी चुनाव नहीं जीत सके। इसके बाद पिछले वर्ष नौ दिसम्बर को उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव यूनियन की प्रबंध समिति का चुनाव जीतकर सभापति बने थे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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