Sunday, December 4, 2022
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कुछ देर पेट के बल लेटने से ऑक्सीजन की कमी को किया जा सकता है दूर

पैनिक डिसआर्डर से आक्सीजन की कमी महसूस करते हैं अधिकांश लोग : डा. कीर्तिवर्धन सिंह
जन एक्सप्रेस संवाददाता
कानपुर नगर। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर लोगों को अधिक चपेट में ले रही है और देखा जा रहा है कि सबसे पहले आक्सीजन की कमी मरीज को होती है। ऐसे मरीज अगर समय से अस्पताल पहुंच जाते है तो कोई खास परेशानी नहीं होती, लेकिन वर्तमान माहौल में अधिकांश लोग पैनिक डिसआर्डर (मानसिक रुप से) से भी आक्सीजन की कमी महसूस करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में भी मरीज को फौरन करीब 15 मिनट पेट के बल पर सीधा लिटा देना चाहिये, ताकि फेफड़ा सुधार की स्थिति में आ जाये। यह स्थाई समाधान नहीं है, पर राहत अवश्य मिलेगी और इसके बाद नजदीक के चिकित्सक से परामर्श लेकर दवाइयां लें। जिन मरीजों को वास्तविक रुप से आक्सीजन की कमी है उनका इलाज आक्सीजन देकर ही हो सकता है और जो पैनिक डिसआर्डर से ग्रसित होंगे उनको मानसिक इलाज भी मिल जाएगा। यह बातें रविवार को जन एक्सप्रेस से खास बातचीत में वरिष्ठ फिजीशियन डा. कीर्तिवर्धन सिंह ने कहीं।
उन्होंने कहा कोरोना की दूसरी लहर में कोई निश्चित लक्षण नहीं हैं या यूं कहें कि कोरोना अब विलक्षण हो गया है तो गलत नहीं होगा।
जिन लोगों को खांसी, जुखाम और बुखार है तो उनमें लगभग 99 फीसद संभावना रहती है कि कोरोना की चपेट में हैं। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि उपरोक्त लक्षण न होने के बाद भी लोग कोरोना के संक्रमण से ग्रसित हो रहे हैं। इससे साफ है कि कोरोना की यह लहर पिछले वर्ष की अपेक्षा ज्यादा मजबूत हो चुकी है। इसका वायरस हवा में फैल चुका है और कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है। ऐसे में लोग कोशिश करें कि अधिक से अधिक घरों पर रहें जिससे इसकी चेन को तोड़ा जा सके। घरों पर रहने वाले लोग एक और चीज का विशेष ख्याल रखें कि बंद कमरे में तो रहें पर उस कमरे में हवा की निकासी अवश्य हो। जिससे कोरोना का वायरस हवा के माध्यम से बाहर भी जा सके।

दवाइयों के स्टोरेज से बचें
डॉ. सिंह ने बताया कि इन दिनों कोरोना से होनी वाली मौतों की संख्या बढ़ी है और लोग इसको लेकर घबराये हुए हैं। अगर पेट में गैस बनने से किसी के सीने में दर्द उठता तो वह भी अपने को यह मान लेता है कि कोरोना हो गया और आक्सीजन की कमी महसूस करने लगता है। ऐसे में व्यक्ति को चाहिये कि फौरन अपना आक्सीजन लेबल (एसपीओटू) चेक करायें अगर 94 से नीचे है तभी अस्पताल में इलाज के लिए जायें। अगर 94 के ऊपर आक्सीजन लेबल है तो यह सुनिश्चित कर लें कि पैनिक डिसआर्डर का शिकार हुए हैं और लोग खुद ब खुद पैनिक डिसआर्डर से बाहर निकल सकते हैं। हालांकि शुरुआती दौर में मानसिक चिकित्सक से परामर्श ले लें। यह भी बताया कि पैनिक डिसआर्डर से ग्रसित लोग यह प्रयास करते हैं कि सोशल मीडिया में चल रही दवाइयों को खरीद कर रख लेते हैं, जबकि दवाइयों के स्टोरेज करने से पैनिक डिसआर्डर से लोग तेजी से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में दवाइयों के स्टोरेज से लोगों को बचना चाहिये।

15 मिनट के लेटने से बढ़ जाता है आक्सीजन लेबल
डॉ. कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को घबराहट के साथ यह महसूस हो रहा है कि आक्सीजन की कमी हो रही है तो सबसे पहले उस व्यक्ति को करीब 15 मिनट तक पेट के बल सपाट लिटा दें। इससे उसके चेस्ट में दबाव बनेगा और फेफड़े सुधार की स्थिति में आ जाएंगे। इससे अगर उसका आक्सीजन लेबल 90 है तो सामान्य की संख्या 94 तक पहुंच जाएगा। किसी भी प्रकार की दवाइयों का सेवन करने से पूरी तरह से परहेज करें और आराम मिलने पर नजदीक के चिकित्सक को फौरन दिखाएं। बताया कि जिस प्रकार ब्लड की कमी को ब्लड ही दूर कर सकता है ठीक उसी प्रकार आक्सीजन की कमी को आक्सीजन ही दूर कर सकता है। इसलिए आक्सीजन लेने की सोंचे न कि दवाइयां लेने का विचार करें। इस बात का भी ख्याल रखें कि गर्भावस्था के दौरान, वेनस थ्रोम्बोसिस ( नसों में खून के बहाव को लेकर कोई समस्या), गंभीर हृदय रोग में, स्पाइन, फीमर एवं पेल्विक फ्रैक्चर की स्थिति में पेट के बल लेटने में नुकसान भी हो सकता है।

 

 

 

 

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