कानपुर विश्वविद्यालय में हुआ तीन करोड़ 42 लाख का घोटाला

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हास्यास्पद: खुद के फर्जी बिल पास कराने वाले संजय स्वर्णकार व फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने वाले डा. अनिल यादव कर रहे जांच

जन एक्सप्रेस/कमलेश फाईटर
कानपुर नगर। शहर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में घटित हुए तीन करोड़ 42 लाख के घोटाले में जन एक्सप्रेस अपने पाठकों को बीती 22 फरवरी के अंक में बता चुका है कि इस घोटाले में जांच के आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय से हुए हैं परंतु जांच के आदेश होने के बाद कार्यवाही कहीं भी होती दिखाई नहीं दे रही है।
आपको हम बताते चलें कि कानपुर विश्वविद्यालय में अकाउंट विभाग में तैनात पुलकित पांडे, गौरव तिवारी, और विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार संतलाल पाल, पर 3 करोड़ 42 लाख के घोटाले के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता का दावा है विश्वविद्यालय में शिक्षकों के बनाए गए बिलों को बिना किसी आधार पर एसी थर्ड के पास किये गए हैं। जो कि नियमावली के विरुद्ध बनाकर पास कराए गए हैं। शासन के शासनादेश को भी दरकिनार कर हजारों में बिल पास किए जाते रहे। जबकि नियमावली के अनुसार बिल का बनने वाला रुपया बहुत कम होता था लेकिन घोटाले बाजों ने किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी।

पूर्व कुलपति ने गौरव तिवारी को किया था सस्पेंड
इसी प्रकरण में पूर्व कुलपति वैशंपायन ने प्रकरण की शिकायत पर औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान गौरव तिवारी के लॉकर से लगभग 1800 शिक्षकों के बिल जप्त किए गए थे। जिनको देखते हुए पूर्व कुलपति वैशंपायन ने गौरव तिवारी को तत्काल सस्पेंड भी किया था।

सस्पेंड होने वाले गौरव तिवारी को वर्तमान कुलपति ने किया बहाल
कानपुर विश्वविद्यालय से पूर्व कुलपति के जाते ही मौजूदा कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने गौरव तिवारी को उसी पद पर तैनाती दे दी। जिसके बाद सांठगांठ कर जमकर घोटाला किया गया है। पुलकित पांडे और डिप्टी रजिस्ट्रार संतलाल पाल ने भी गौरव तिवारी का सहयोग किया और पैसे का बंदरबांट भी हुआ।

शिकायतकर्ता सौंप चुका है सबूत जांच समिति को फिर भी मामला टांय टांय फिश
शिकायतकर्ता ने जांच कमेटी आदेश पर 102 बिलों को 1 दिसंबर 2020 को बतौर सबूत जमा कर चुका है उसके बावजूद भी यह जांच यही तक ठंडे बस्ते में पडक़र मामला टांय टांय फिस्स हो चुका है।

फर्जी बिल पास कराने वाले संजय स्वर्णकार व धोखा देकर परमानेंट रजिस्ट्रार बने डॉक्टर अनिल यादव भी हैं जांच कमेटी में शामिल
विदित हो कि उच्च शिक्षा मंत्रालय दिल्ली से पत्र आने के बाद विश्वविद्यालय में जांच कमेटी बनाई गई है। परंतु अब आगे की लाइन पढऩे के बाद हंसने पर मजबूर हो जाएंगे क्योंकि खुद के फर्जी तरीके से बिल पास कराने वाले संजय स्वर्णकार भी इसी जांच कमेटी में शामिल हैं और इसके बाद जो नाम आप सुनने जा रहे हैं डॉक्टर अनिल यादव वह खुद सेल्फ फाइनेंस का अनुभव रखने के बाद विधि विधान के विरुद्ध जाकर धोखा देते हुए परमानेंट रजिस्ट्रार के पद पर आसीन हुए हैं। अब ऐसे में कैसे जांच समिति से आरोपियों को सजा दिलाए जाने की उम्मीद की जा सकती है। इनके साथ डॉ. सुधांशु पंड्या और मौजूदा फाइनेंस ऑफिसर को जांच सौंपी गई है।

अगले अंक में खुलेगा फाइल दबने का राज
अगले अंक में हम बताएंगे कि आपको आखिर क्यों दबी पड़ी है डिप्टी रजिस्ट्रार संतलाल पाल, पुलकित पांडेऔर गौरव तिवारी की फाइल……


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