यमुना एक्सप्रेस-वे हादसा मौत के बाद बस की फिटनेस पर सवाल, इमरजेंसी गेट भी नहीं खुला
लखनऊ से दिल्ली जा रही तुषार टूर्स एंड ट्रैवल्स की डबल डेकर बस कंटेनर से टकराई; एक महिला की मौत, आठ घायल

जन एक्सप्रेस/मथुरा :- यमुना एक्सप्रेस-वे पर सोमवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में एक महिला की मौत और आठ यात्रियों के घायल होने के बाद अब बस की फिटनेस, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकास की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लखनऊ से दिल्ली जा रही तुषार टूर्स एंड ट्रैवल्स की डबल डेकर बस सुरीर क्षेत्र में माइलस्टोन संख्या 77 के पास आगे चल रहे कंटेनर से टकरा गई थी। हादसे में दिल्ली निवासी किरण कुमारी की मौत हो गई, जबकि बस चालक और परिचालक समेत आठ लोग घायल हुए।
इस दुर्घटना को लेकर एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। बस में सवार उत्कर्ष मिश्रा के भाई स्पर्श के मुताबिक, टक्कर के बाद जब यात्रियों को बस से बाहर निकालने की कोशिश की गई, तो बस का इमरजेंसी गेट नहीं खुल रहा था। इसके बाद गेट को तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला गया। इस खुलासे ने बस में उपलब्ध आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इमरजेंसी गेट नहीं खुला, तो कितनी सुरक्षित थी बस?
यात्रियों की सुरक्षा के लिए बस में आपातकालीन निकास की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। दुर्घटना, आग लगने या बस के पलटने जैसी स्थिति में यही निकास यात्रियों को जल्द बाहर निकालने में मदद करता है। ऐसे में हादसे के बाद इमरजेंसी गेट का नहीं खुलना गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि, गेट क्यों नहीं खुला, इसमें तकनीकी खराबी थी या टक्कर के कारण वह जाम हो गया था, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या बस के आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच की गई थी? क्या यात्रा शुरू होने से पहले वाहन की सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण हुआ था? इन बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
बस की फिटनेस और परमिट की हो जांच
तुषार टूर्स एंड ट्रैवल्स की बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अब उसके फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, बीमा, तकनीकी स्थिति और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। साथ ही, बस के ब्रेक, टायर, आपातकालीन गेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की भी जांच होनी चाहिए।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इमरजेंसी गेट का नहीं खुलना अपने आप में बस का फिटनेस प्रमाणपत्र अमान्य होने का प्रमाण नहीं है। फिर भी, यात्रियों की ओर से सामने आया यह विवरण संबंधित परिवहन अधिकारियों के लिए जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होना चाहिए।
चालक को झपकी आने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय बस चालक को झपकी आने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, दुर्घटना का वास्तविक कारण अभी जांच का विषय है। यदि चालक की थकान या नींद हादसे की वजह रही, तो चालक के विश्राम, ड्यूटी अवधि और बस संचालन की व्यवस्था की भी पड़ताल होनी चाहिए।
लंबी दूरी की बसों में यात्रियों की सुरक्षा केवल चालक के अनुभव पर निर्भर नहीं हो सकती। वाहन की तकनीकी स्थिति, निर्धारित गति, सुरक्षित दूरी और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

जिम्मेदारी तय करना जरूरी
यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए इस हादसे ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यात्री बसों की जांच प्रणाली पर भी ध्यान खींचा है। संबंधित अधिकारियों को दुर्घटनाग्रस्त बस की तकनीकी जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इमरजेंसी गेट क्यों नहीं खुला और क्या वाहन सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरा उतर रहा था।
एक महिला की मौत और आठ लोगों के घायल होने की यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना मानकर नहीं छोड़ी जानी चाहिए। जांच में यदि किसी तरह की लापरवाही, तकनीकी खामी या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। सवाल यही है कि यदि दुर्घटना के बाद यात्रियों को बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी गेट तोड़ना पड़े, तो लंबी दूरी की यात्रा पर निकलने से पहले बस की सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी थी? इस सवाल का जवाब जांच और कार्रवाई के जरिए सामने आना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य यात्री की जान जोखिम में न पड़े।






