
जन एक्सप्रेस नैनीताल: बीते गुरुवार को जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दिन शहर में राजनीतिक भूचाल आ गया। मतदान स्थल के पास ही पांच जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के आरोप सामने आए, जिससे कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा दिया।
चार अलग-अलग FIR, भाजपा नेता और कार्यकर्ता नामजद
अध्यक्ष पद की उम्मीदवार पुष्पा नेगी, सदस्य जीशान्त कुमार, और अन्य परिजनों की तहरीर पर चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, प्रत्याशी के पति आनंद दर्मवाल, सहित कुल 11 नामजद और 15–20 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
एसआई की तहरीर पर शुरुआती मुकदमा, फिर बढ़ी कार्रवाई
पहले पुलिस ने एसआई सतीश उपाध्याय की तहरीर पर कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और दबाव के बाद कांग्रेस के सदस्यों और उनके परिजनों की ओर से विस्तृत तहरीर दी गई, जिसके बाद पुलिस ने नामजद आरोपियों के विरुद्ध भी केस दर्ज कर लिया।
मतदान स्थल के पास पुलिस की मौजूदगी में हुआ कथित अपहरण
घटना के दौरान अगवा किए गए सदस्यों में डिकर सिंह मेवाड़ी, प्रमोद सिंह, तरुण कुमार शर्मा, दीप सिंह बिष्ट और विपिन सिंह के नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी सदस्य पुलिस की मौजूदगी में जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जाए गए। कांग्रेस ने इस घटना को “सरेआम गुंडागर्दी” बताया है।
नामजद आरोपियों में कई प्रमुख भाजपा कार्यकर्ता शामिल
एसओ रमेश सिंह बोरा ने जानकारी दी कि आरोपों के आधार पर जिन लोगों पर केस दर्ज हुआ है, उनमें आनंद दर्मवाल, शंकर कोरंगा, प्रताप बिष्ट, चतुर बोरा, प्रमोद बोरा, प्रखर साह, बीबी भाकुनी, विशाल नेगी, पंकज नेगी, शुभम दर्मवाल और कोमल दर्मवाल के नाम शामिल हैं। इनके विरुद्ध BNS की धारा 191(2), 140(3), 115(2), 352, 351(3), 74, 62 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब आगे क्या? जांच पर टिकी सबकी नजरें
यह मामला न केवल नैनीताल, बल्कि पूरे उत्तराखंड की राजनीति में गंभीर हलचल पैदा कर चुका है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच किस दिशा में बढ़ती है, और क्या आरोपियों पर कोई कड़ी कार्रवाई होती है।






