
जन एक्सप्रेस देहरादून: टिहरी बांध पुनर्वास विभाग के एक पुराने भूमि फर्जीवाड़े को देहरादून प्रशासन ने उजागर कर वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठी पुलमा देवी को राहत पहुंचाई है। जिलाधिकारी सविन बंसल के सख्त रुख और त्वरित कार्रवाई के चलते प्रशासन ने एक ही दिन में भूमि अभिलेखों में सुधार कर पुलमा देवी का नाम भूमिधरी में दर्ज करा दिया।
जनता दर्शन में पहुंची थी फरियादी, प्रशासन ने तुरंत लिया संज्ञान
जून 2025 के द्वितीय जनता दर्शन में शास्त्रीनगर तपोवन निवासी पुलमा देवी ने अपनी पीड़ा जिलाधिकारी के समक्ष रखी थी। पुलमा देवी ने वर्ष 2007 में टिहरी विस्थापितों के लिए आवंटित भूमि खरीदी थी, जिसकी रजिस्ट्री भी हुई। लेकिन वर्ष 2020 में उसी भूमि को किसी अन्य व्यक्ति को पुनः बेच दिया गया।
पुनर्वास विभाग की बड़ी चूक, 2019 में दोबारा चढ़ा दी गई भूमिधरी
जांच में सामने आया कि पुनर्वास खंड ऋषिकेश द्वारा 2019 में बिना तथ्यात्मक जांच के चंदरू पुत्र अमरू को फिर से उसी भूमि की भूमिधरी दे दी गई, जो वह पहले ही वर्ष 2007 में बेच चुका था। यह घोर लापरवाही सामने आने पर जिलाधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
अधीक्षण अभियंता का वाहन जब्त, अधिकारियों को तलब किया गया
घोर लापरवाही के लिए टिहरी बांध पुनर्वास विभाग के अधीक्षण अभियंता का वाहन जब्त कर लिया गया है। अधिकारियों को समस्त दस्तावेजों सहित प्रस्तुत होने के आदेश दिए गए हैं। डीएम ने यह मामला एसडीएम मुख्यालय अपूर्वा को सौंपते हुए अग्रिम क्रिमिनल प्रोसेसिंग शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
तहसील को भेजा गया स्वामित्व सुधारीकरण पत्र, उसी दिन हुआ नामांतरण
पुनर्वास विभाग ने 7 जुलाई को तहसील विकासनगर को पत्र भेजकर 2019 की गलत एंट्री निरस्त करने और पुलमा देवी के नाम भूमि दर्ज करने का अनुरोध किया। तहसील ने उसी दिन कार्रवाई करते हुए नामांतरण कर दिया।
अब तक की कार्रवाई से स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी के निर्देशों और कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासन ऐसे फर्जीवाड़ों पर सख्त रुख अपनाए हुए है। पुलमा देवी जैसे पीड़ितों को अब न्याय के लिए वर्षों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।






