
जन एक्सप्रेस / नई टिहरी।
जनपद मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सहित सभी राजस्व न्यायालयों में आयोजित राजस्व लोक अदालत ने त्वरित न्याय प्रदान करने की दिशा में एक उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस लोक अदालत के दौरान कुल 226 वाद सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुए, जिनमें से 214 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। यह पहल न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, बल्कि इससे आम नागरिकों को भी बड़ी राहत मिली है।
राजस्व लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों का शीघ्र और आपसी सहमति के आधार पर समाधान करना होता है। इसी क्रम में जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने स्वयं न्यायालय नई टिहरी में 5 वादों का निस्तारण कर इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा विभिन्न असिस्टेंट कलेक्टरों द्वारा भी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से मामलों का समाधान किया गया। टिहरी के असिस्टेंट कलेक्टर कमलेश मेहता द्वारा 6, प्रतापनगर के अंकित राज द्वारा 10, घनसाली के अलकेश नौडियाल द्वारा 7, कीर्तिनगर की मंजू राजपूत द्वारा 47, नरेंद्रनगर के आशीष चंद्र घिल्डियाल द्वारा 19 तथा धनोल्टी की नीलू चावला द्वारा 8 वादों का निस्तारण किया गया।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न तहसीलों में तहसीलदारों द्वारा भी सक्रियता दिखाते हुए कुल 112 मामलों का निस्तारण किया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वित प्रयासों के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को गति देने में सफलता प्राप्त हुई है।
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने इस अवसर पर कहा कि राजस्व लोक अदालत के माध्यम से वादों का निस्तारण आपसी सहमति, सरल प्रक्रिया और त्वरित सुनवाई के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से वादकारियों को शीघ्र न्याय मिलने के साथ-साथ समय और संसाधनों की भी बचत हुई है। साथ ही, इससे न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में भी कमी आएगी, जो भविष्य में न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुगम बनाएगी।
राजस्व लोक अदालत जैसी पहलें न्याय व्यवस्था को जनहितकारी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे न केवल लोगों का न्याय प्रणाली पर विश्वास मजबूत होता है, बल्कि प्रशासन और आम जनता के बीच समन्वय भी बेहतर होता है।
कुल मिलाकर, नई टिहरी में आयोजित यह राजस्व लोक अदालत एक सफल उदाहरण के रूप में सामने आई है, जिसने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो न्यायिक प्रक्रिया को तेज, सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है।






