सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 40% से कम दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिली बड़ी राहत
जौनपुर निवासी अधिवक्ता आशुतोष यादव की प्रभावी पैरवी से हज़ारों अभ्यर्थियों को मिला न्याय, UPPSC ने बदला रुख

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर निवासी अधिवक्ता आशुतोष यादव की प्रभावी पैरवी से मिला न्याय, हज़ारों अभ्यर्थियों के लिए खुला रास्ता नई दिल्ली माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने गोपालजी—जिनकी दिव्यांगता 40% से कम है—को ARO-2023 की मुख्य परीक्षा में अपनी पसंद के लेखक/स्क्राइब के साथ परीक्षा देने की अनुमति प्रदान कर दी है। UPPSC द्वारा यह अनुमति पत्र संख्या 75/09/Writ/E-4/2025-26, दिनांक 28 जनवरी 2026 के माध्यम से जारी की गई।
यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2(s), भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा जारी विभिन्न कार्यालय ज्ञापनों, और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सिविल अपील संख्या 273/2021 (विकास कुमार बनाम UPSC एवं अन्य) में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, UPPSC द्वारा अब तक 40% से कम दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी।सभी वैधानिक और प्रशासनिक प्रयासों के विफल होने के बाद, गोपालजी ने अपने संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। 27 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान किए जाने के प्रति स्पष्ट रुझान व्यक्त किया।
इस महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड आशुतोष यादव ने प्रभावी और सशक्त रूप से पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता आशुतोष यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के थाना बक्शा क्षेत्र के मूल निवासी हैं तथा वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं।उनकी सटीक कानूनी दलीलों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला दिए जाने के बाद न्यायालय ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उसी दिन UPPSC के स्थायी अधिवक्ता को न्यायालय का नोटिस विधिवत रूप से तामील कराया गया। सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के तुरंत बाद UPPSC ने अपना रुख बदलते हुए गोपालजी को उनकी पसंद के लेखक/स्क्राइब के साथ लिखित परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान कर दी।
यह कदम दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के वास्तविक और प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह निर्णय उन असंख्य अभ्यर्थियों के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा, जिनकी दिव्यांगता 40% से कम है और जिन्हें अब तक स्पष्ट कानूनी प्रावधानों एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद परीक्षा सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा था। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में सभी लोक सेवा आयोगों और भर्ती संस्थाओं के लिए बाध्यकारी नजीर के रूप में कार्य करेगा।






