28 दिन का महीना, महंगे रिचार्ज और गायब नेटवर्क: ग्रामीण भारत से हो रहा डिजिटल अन्याय

जन एक्सप्रेस/अमेठी: सरकार भले ही देश को डिजिटल इंडिया बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जनपद के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। कभी नेटवर्क पूरी तरह गायब रहता है तो कभी इंटरनेट की रफ्तार इतनी धीमी होती है कि जरूरी काम भी अधर में लटक जाते हैं। इसके बावजूद टेलीकॉम कंपनियां उपभोक्ताओं से पूरे पैसे वसूल कर सिर्फ 28 दिन की वैधता देकर महीना पूरा मान रही हैं।ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि नेटवर्क की बदहाली के कारण सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों, किसानों और मजदूर वर्ग को उठाना पड़ रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई, परीक्षा फॉर्म, सरकारी पोर्टल, राशन कार्ड, पेंशन, आयुष्मान, बैंकिंग और रोजगार से जुड़ी सेवाएं नेटवर्क के अभाव में बाधित हो रही हैं।
कई बार आपात स्थिति में कॉल तक नहीं लग पाती, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विकास खण्ड सिंहपुर की ग्राम पंचायत रामपुर पांवरा, इन्हौना, कमई, शिवरतन गंज के पूरे गांव चौबे निवासी अंकित त्रिवेदी,सोनू ,अमित तिवारी आदि ग्रामीणों का कहना है कि टेलीकॉम कंपनियां आए दिन अपने रिचार्ज प्लान के दाम बढ़ा रही हैं, जबकि गांवों में नेटवर्क और इंटरनेट बेहद धीमा चलता है। कई बार एक से दो घंटे तक नेटवर्क पूरी तरह गायब रहता है। ऐसे में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन शिकायत करने पर कंपनियां केवल “नेटवर्क सुधाराधीन है” कहकर जिम्मेदारी से बच निकलती हैं।सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन को ही महीना मानकर साल में 13 बार रिचार्ज करवा रही हैं। इससे पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पूरा देश 30 या 31 दिन के महीने पर चलता है तो मोबाइल कंपनियों के लिए महीना सिर्फ 28 दिन का क्यों?ग्रामीणों का आरोप है कि शहरों में 4G और 5G सेवाओं का प्रचार तो जमकर किया जा रहा है, लेकिन गांवों में आज भी 2G जैसी स्पीड मिल रही है। इससे डिजिटल खाई और गहरी होती जा रही है। लोगों ने सरकार और दूरसंचार नियामक संस्था से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और इंटरनेट की गुणवत्ता में तत्काल सुधार कराया जाए, रिचार्ज की वैधता 30 दिन सुनिश्चित की जाए और मनमानी दर बढ़ोतरी पर रोक लगाई जाए, ताकि डिजिटल इंडिया का सपना गांवों तक भी साकार हो सके।







