अफसरों की शामत! डीएम के औचक निरीक्षण में 48 कर्मचारी गैरहाजिर

जन एक्सप्रेस उरई/जालौन:
जनपद जालौन में शासकीय कार्यालयों की कार्यशैली पर उस वक्त सवालिया निशान लग गया, जब जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार सुबह 10:10 बजे औचक निरीक्षण के दौरान 48 कर्मचारी गैरहाजिर पाए। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। डीएम ने सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकते हुए, उनसे तत्काल स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश जारी किए हैं।
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले डीएम प्रांतीय खंड कार्यालय पहुंचे, जहाँ 9 कर्मचारी गायब मिले। इसके बाद लोक निर्माण विभाग प्रथम में 11, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में स्वयं डीआईओएस राजकुमार पंडित सहित 11, बेसिक शिक्षा विभाग में 2, नगर पालिका उरई में अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील सहित 8, और विद्युत वितरण खंड प्रथम कार्यालय में अधिशासी अभियंता जितेंद्र नाथ समेत 7 कर्मचारी अनुपस्थित मिले।
गंदगी, टूटी कुर्सियाँ और बेहाल दफ्तर देख भड़के डीएम
प्रांतीय खंड कार्यालय में टूटी कुर्सियाँ, गंदगी और बेतरतीब सामान देख डीएम बुरी तरह नाराज़ हो गए। उन्होंने साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और समुचित रखरखाव के निर्देश दिए। इसके अलावा, नगर पालिका उरई में डेडिकेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर की समीक्षा के दौरान जब शिकायतों के निस्तारण की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली, तो डीएम का पारा और चढ़ गया।उन्होंने साफ निर्देश दिए कि शिकायतों का सिस्टमेटिक रिकॉर्ड रखा जाए—जिसमें शिकायतकर्ता का नाम, समय, दिनांक और निस्तारण की स्थिति साफ-साफ दर्ज हो।
10 से 12 बजे तक अनिवार्य उपस्थिति का आदेश, जनता की सुनवाई को प्राथमिकता दें अधिकारी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक अधिकारी प्रातः 10 से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहें। इस अवधि को जनता की शिकायतों के निस्तारण के लिए आरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि अब लापरवाही और गैरजवाबदेही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।जनता को कार्यालयों में चक्कर काटने की नौबत नहीं आनी चाहिए, और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें—डीएम का यह दो टूक संदेश अब पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है।






