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चित्रकूट में निजी पेट्रोल पंप के लिए अवैध मौरमीकरण, सवालों के घेरे में अधिकारी और सरकार

जन एक्सप्रेसचित्रकूट: मऊ विकास खंड के ग्राम पंचायत खोहर से MP को जोड़ने वाले रास्ते पर हाल ही में एक निजी पेट्रोल पंप के लिए मौरमीकरण (मोरमिटिंग) कराया गया है। इस सड़क निर्माण को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं कि यह कार्य किसकी कृपा से हुआ और किस मद या योजना के तहत मौरमीकरण किया गया। इस बीच, यह भी सवाल उठ रहा है कि किस प्रभाव के तहत इस कार्य को इतनी जल्दी और बिना किसी आधिकारिक अनुमति के कराया गया।

निजी पेट्रोल पंप का उद्घाटन और विवादों का सिलसिला

उल्लेखनीय है कि 7 मार्च को सपा जिलाध्यक्ष शिवशंकर यादव ने प्रभावशाली तरीके से इस पेट्रोल पंप का उद्घाटन किया। हालांकि, इस उद्घाटन समारोह के दौरान विवाद पैदा हुआ क्योंकि दूसरे सत्र में भाजपा समर्थित विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी (लल्ली महराज) का उद्घाटन करने का कार्यक्रम था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। इस पूरी घटना के बाद क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर यह सड़क निर्माण किसके प्रभाव में हुआ और इसकी वास्तविकता क्या है।

बिना अनुमति के अवैध मौरमीकरण, पेड़ की भी हुई क्षति

ग्रामीणों की मानें तो इस मार्ग पर मौरमीकरण के लिए बिना किसी अनुमति के सरकारी भूमि का अवैध खनन किया गया। खोहर ग्राम पंचायत के घूरवा चुहणा की सरकारी ज़मीन से JCB द्वारा मौरम खोदकर सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रॉलियों में मौरम को परिवहन किया गया। इतना ही नहीं, एक नीम का पेड़, जो पर्यावरण को संतुलित करने का कार्य करता था, खनन की चपेट में आ गया। JCB द्वारा उसकी जड़ें खोदकर पेड़ को नष्ट कर दिया गया, जिससे वह सूखने के कगार पर आ गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी कर, निजी लाभ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया गया।

खंड विकास अधिकारी का खुलासा: सड़क निर्माण में सहमति नहीं

इस मामले पर जब खंड विकास अधिकारी मऊ से बात की गई तो उन्होंने खुलासा किया कि इस सड़क निर्माण के लिए किसी भी प्रकार की सहमति नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि सड़क बनाने के लिए स्टीमेट की चर्चा जरूर की गई थी, लेकिन मौरमीकरण के लिए कोई भी अनुमति नहीं दी गई। इस बयान ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया, क्योंकि अब यह सवाल उठ रहा है कि यह सड़क आखिर किसकी प्रभावशाली ताकत से और बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बनवायी गई।

सरकार की नीति पर उठे सवाल

यह पूरा मामला सरकार की योजनाओं और नीति की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। सरकारी नियमों का उल्लंघन और बिना अनुमति के अवैध खनन, यह सारी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि कहीं न कहीं स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और प्रभावशाली लोगों के दबाव का असर दिख रहा है। सरकार की ‘यूपी में बहुत कुछ बदल रहा है’ की नीति पर यह घटना सवालिया निशान लगा रही है, क्योंकि न तो नियमों का पालन हो रहा है और न ही पारदर्शिता।

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