स्कूल में फंसे गुलदार को सुरक्षित पकड़ने में चला 12 घंटे का ऑपरेशन

जन एक्सप्रेस/हल्द्वानी(उत्तराखण्ड) : हल्द्वानी के नैनीताल रोड स्थित सेंट थेरेसा स्कूल में बीते तीन दिनों से छिपे गुलदार को आखिरकार वन विभाग की टीम ने 12 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित पकड़ लिया। यह घटना उस वक्त सामने आई जब स्कूल में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सफाई कर्मचारी ने परिसर में संदिग्ध हलचल देखी और बाद में सीसीटीवी में गुलदार की मौजूदगी की पुष्टि हुई।
CCTV फुटेज से हुआ खुलासा
शुक्रवार सुबह जब महिला सफाई कर्मचारी स्कूल के पीछे वाले हिस्से की सफाई कर रही थी, तो उसे फर्श पर बड़े पंजों के निशान और बिखरा हुआ सामान नजर आया। प्रबंधन ने जब सीसीटीवी चेक किया तो उसमें रात करीब दस बजे एक गुलदार खुलेआम घूमता दिखा।
ट्रैप कैमरे लगे, शनिवार सुबह शुरू हुआ अभियान
सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। गुलदार के हमलावर हो सकने की आशंका को देखते हुए शुक्रवार रात ही स्कूल में ट्रैप कैमरे लगाए गए। शनिवार सुबह सात बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। एसडीओ मनिंदर कौर, रेंजर आनंद आर्य, एसओजी इंचार्ज कैलाश तिवाड़ी और रेस्क्यू प्रभारी कैलाश पांडे के नेतृत्व में हल्द्वानी, भाखड़ा, गदगदिया और रुद्रपुर रेंज की टीमें मौके पर पहुंचीं। टीम के साथ दो वन्यजीव चिकित्सक भी मौजूद रहे।
ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया गुलदार
रेस्क्यू के दौरान गुलदार कभी सीढ़ियों में, कभी टॉयलेट में और कभी गैलरी में भागता रहा। वह कई बार वनकर्मियों पर झपटने की कोशिश भी करता दिखा, जिस कारण टीम के फ्रंटलाइन कर्मियों को बाडी प्रोटेक्टर पहनाए गए। दोपहर बाद तीसरे विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु पांगती को रानीबाग रेस्क्यू सेंटर से बुलाया गया। शाम पांच बजे ट्रैंकुलाइज गन से गुलदार को बेहोश किया गया। दो घंटे की निगरानी के बाद गुलदार को पिंजरे में बंद कर तराई केंद्रीय डिवीजन के गदगदिया रेंज के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
बाल-बाल बचे वनकर्मी, तंदुरुस्त था गुलदार
वन विभाग के अनुसार गुलदार करीब डेढ़ वर्ष का नर था और पूरी तरह स्वस्थ था। तीन दिन तक कैद रहने से वह चिढ़चिढ़ा और आक्रामक हो गया था, इसी वजह से उसने कई बार रेस्क्यू टीम पर हमला करने की कोशिश की।
स्कूल व स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस
गुलदार के पकड़े जाने के बाद स्कूल प्रशासन, वन विभाग और आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली। गनीमत रही कि स्कूल में गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
जनहित में सुझाव:
नैनीताल रोड जैसे रिहायशी और शैक्षिक क्षेत्रों में जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही पर वन विभाग को विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। साथ ही स्कूलों और कॉलोनियों को समय-समय पर वन्यजीव सुरक्षा से जुड़ी प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी दी जानी चाहिए।






