
जन एक्सप्रेस/ रानीखेत: रानीखेत में सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का भव्य समापन शनिवार को दीवान सिंह हाल में हुआ। गुजरात से आए प्रसिद्ध कथक कलाकारों और स्थानीय प्रतिभागियों की मोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ, अतिथियों का हरित स्वागत
समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि एडम कमांडेंट कर्नल ब्रिजेश सिंह सावियन, विशिष्ट अतिथि छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी कुनाल रोहिला और पूर्व रक्षा निदेशक डी.एन. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर की।
सांस्कृतिक समिति की ओर से अतिथियों का बैज अलंकरण व पौध भेंट कर पारंपरिक हरित स्वागत किया गया। प्रशिक्षकों को अंग वस्त्र व ऐपण कृति भेंट कर समिति अध्यक्ष विमल सती ने सम्मानित किया।
“कथक, भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर” – कर्नल सावियन
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कथक को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत बताते हुए कहा कि इसकी जड़ें रामायण और महाभारत काल तक जाती हैं। उन्होंने कहा कि रानीखेत जैसे पर्वतीय क्षेत्र में इस कला को प्रोत्साहन देना अत्यंत सराहनीय है।
विशिष्ट अतिथि कुनाल रोहिला ने सांस्कृतिक गतिविधियों में छावनी परिषद द्वारा हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
118 प्रतिभागियों ने लिया कार्यशाला में भाग
कार्यशाला में कुल 118 महिलाओं और बच्चों ने भाग लेकर कथक नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अध्यक्ष विमल सती ने इसे रानीखेत में आयोजित पहली व्यापक कथक कार्यशाला बताया और कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखा जाएगा।
कला, शिक्षा और समाज सेवा क्षेत्र के प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह में मंजू साह, भुवन चंद्र साह और सतीश चंद्र पांडे को कला और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही विद्यालयों के प्रधानाचार्य सुनीता अधिकारी, सुनील मसीह, विनोद खुल्बे, रीतिका कांडपाल और विमला बिष्ट को भी शैक्षिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
भव्य प्रस्तुतियां और प्रभावशाली संचालन
कार्यक्रम का संचालन ज्योति साह और प्रो. निष्ठा देसाई ने किया। मंच पर प्रस्तुत छात्रों की भावपूर्ण कथक रचनाओं ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर डॉ. जया पांडे, डॉ. अनिल जोशी, मोहन नेगी, हिमांशु उपाध्याय सहित समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे।
भावनगर टीम की ओर से विशेष सम्मान
कार्यक्रम के अंत में गुजरात के भावनगर से आए दल ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली सांस्कृतिक समिति के सदस्यों को विशेष रूप से सम्मानित किया।






