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देवकीनंदन ठाकुर को आगरा एसीजेएम‑10 की कोर्ट से नोटिस

कथावाचन में ‘जयचंद’ आरोपित, इतिहास में गद्दार साबित करने के कोई प्रमाण नहीं

जन एक्सप्रेस आगरा: प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर को आगरा की एसीजेएम‑10 कोर्ट ने 9 जुलाई को अदालत में पेश होने का नोटिस भेजा है। यह आदेश उनके खिलाफ दाखिल आपराधिक मानहानि मामले की अगली सुनवाई के संबंध में आया है। 2 दिसंबर 2024 को वाराणसी में आयोजित एक कथा के दौरान ठाकुर ने कहा कि “भारत विभाजन और कश्मीरी ब्राह्मणों के नरसंहार के लिए ‘जयचंदों’ को दोषी ठहराना चाहिए”, और यह कि “जयचंदों के कारण सनातन धर्म को खतरा है और पाकिस्तान बना”।अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आगरा की सिविल जज (जूनियर डिवीजन‑1) कोर्ट में 3 या 4 दिसंबर को आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल किया, जिसमें दावा किया गया कि इतिहास में यह कहने का कोई आधार नहीं है, और टिप्पणी क्षत्रिय समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।

पहली सुनवाई और अनुपस्थिति

शुरुआती सुनवाई 7 मार्च 2025 को हुई, जिसमें ठाकुर की ओर से वकील उपस्थित थे और अगली तारीख 7 अप्रैल तय हुई।

अप्रैल में प्रतीक्षा के बाद 13 मई को फिर एक सुनवाई हुई, लेकिन तब भी ठाकुर नहीं आए।

अब अगली सुनवाई—9 जुलाई

कई बार संस्था की अनुपस्थिति को देखते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर देवकीनंदन ठाकुर को 9 जुलाई को अदालत में हाज़िरी देने को कहा है। यह सुनवाई एसीजेएम‑10, आगरा के समक्ष होगी।

न्यायिक प्रक्रिया और संभावित परिणाम आपराधिक मानहानि के मामले में अगर कोई कथाकार कोर्ट में दोषी पाया गया, तो उसे सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। भविष्य की सुनवाई में इतिहास, गवाह और कथानक संदर्भ जैसे तर्क प्रमुख होंगे।इस पोर्टल पर दूसरी पिछली विवादित टिप्पणियों (जैसे SC‑ST एक्ट, वक्फ बोर्ड मुद्दा आदि) की वजह से भी उनका नाम पहले विवादों में रहा है।

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