उत्तराखंडदेहरादून

2026 तक पूरी होंगी 6 बड़ी पारेषण परियोजनाएं, सरकार ने कसी कमर

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पिटकुल की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित, एडीबी द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं से ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या होगी दूर

जन एक्सप्रेस/देहरादून(उत्तराखण्ड) : उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार ने कमर कस ली है। मानसून के दौरान निर्बाध और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सोमवार को सचिवालय स्थित सभागार में पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने की।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पारेषण तंत्र में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मानसून के दौरान SOP का पालन अनिवार्य किया गया है। साथ ही, विद्युत लाइन में ब्रेकडाउन की स्थिति में तुरंत एनालिसिस कर सप्लाई बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में पिटकुल अधिकारियों ने बताया कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा वित्त पोषित छह प्रमुख पारेषण परियोजनाएं वर्ष 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। ये परियोजनाएं हैं:

  • 220 केवी सेलाकुई
  • 132 केवी खटीमा
  • 132 केवी लोहाघाट (चंपावत)
  • 132 केवी धौलाखेड़ा (नैनीताल)
  • 132 केवी आराघर (देहरादून)
  • 220 केवी मंगलौर

इन परियोजनाओं के पूरा होने से बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या में भारी राहत मिलेगी, जिससे न सिर्फ उद्योग जगत को लाभ होगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी निर्बाध बिजली मिलेगी।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि सभी निर्माणाधीन और प्रस्तावित पारेषण परियोजनाओं को समयसीमा में और बिना लागत वृद्धि के पूरा किया जाए। इसके साथ ही, किसी भी मास्टर प्लान को लागू करने से पहले सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) से उसकी समीक्षा कराना अनिवार्य होगा। लाइन विस्तारीकरण और नए सबस्टेशन की स्थापना से पूर्व भूमि अधिग्रहण के प्रस्तावों को नए मानकों के अनुसार तैयार कर सरकार को भेजने के निर्देश भी जारी किए गए। पिटकुल की रेटिंग में हुए सुधार का भी जिक्र बैठक में हुआ, जिससे भविष्य में मिलने वाले ऋणों पर ब्याज में छूट का लाभ मिलेगा।

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