
जन एक्सप्रेस देहरादून: देहरादून नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने आखिरकार एक नया फॉर्मूला तय कर लिया है। छह माह से खाली पड़ी इस अहम कुर्सी के लिए अब वही दावेदार चुना जाएगा, जिसे कांग्रेस के कम से कम 50% पार्षदों का समर्थन प्राप्त होगा। पार्टी इसे संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक सक्रियता से जोड़कर देख रही है।
हर नगर निकाय में यही मॉडल अपनाएगी कांग्रेस
सिर्फ देहरादून ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर के नगर निकायों में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति इसी मानक पर होगी। पार्टी हाईकमान ने जिलाध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें दावेदारों की स्थिति और पार्षदों के समर्थन का ब्यौरा शामिल होगा।
चार नाम रेस में सबसे आगे, समर्थन जुटाने में जुटे पार्षद
देहरादून नगर निगम में कांग्रेस के कुल 23 पार्षद हैं। सूत्रों के अनुसार, कोमल वोहरा, संगीता गुप्ता, अर्जुन सोनकर और इतात खान नेता प्रतिपक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। सभी दावेदार निजी स्तर पर पार्षदों से संवाद कर समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं।
नेता प्रतिपक्ष का पद क्यों है कांग्रेस के लिए अहम?
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल सत्ता विरोधी आवाज उठाने तक सीमित नहीं है। यह पद विपक्ष की सक्रिय भागीदारी, विकास कार्यों की निगरानी और कांग्रेस शासित वार्डों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का मंच भी है।कांग्रेस के लिए यह पद राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है, खासकर ऐसे समय में जब नगर निकायों में संगठन की पकड़ और जनसंपर्क को मजबूत करने की चुनौती पार्टी के सामने है।
जल्द आ सकता है फैसला
पार्टी सूत्रों के अनुसार, जिलाध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों की रिपोर्ट के आधार पर हाईकमान जल्द ही निर्णय ले सकता है। संभावना है कि आगामी कुछ हफ्तों में नेता प्रतिपक्ष की घोषणा कर दी जाएगी।
राजनीतिक समीकरणों का अखाड़ा बनेगा निगम
देहरादून नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के साथ ही राजनीतिक समीकरण भी नए सिरे से बनते दिख सकते हैं। देखना यह होगा कि किसे मिलता है बहुमत का साथ और कौन संभालेगा कांग्रेस की कमान निगम में।






