उत्तरकाशीउत्तराखंड

9 से 13 नवंबर तक गाजण क्षेत्र में गूंजेगी देवध्वनि — आरंभ होगा प्रसिद्ध श्री गुरु चौरंगीनाथ देवता मेला

दो सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का पर्व — पाँच गांवों में होगा आयोजन

जन एक्सप्रेस उत्तरकाशी /डुंडा ब्लॉक (चंद्रप्रकाश बहुगुणा):गाजण क्षेत्र के पाँच गांव — दिखोली, चौंडियाट, सौड़, लोदाडा और भेटियारा — में हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाला प्रसिद्ध श्री गुरु चौरंगीनाथ देवता मेला इस वर्ष 9 नवंबर से 13 नवंबर 2025 तक बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।लगभग दो शताब्दियों से चली आ रही यह पौराणिक परंपरा स्थानीय लोकआस्था, देवसंस्कृति और सामाजिक एकता का अनुपम प्रतीक मानी जाती है।

पाँच दिवसीय आयोजन कार्यक्रम

9 नवंबर: चौंडियाट गाँव

10 नवंबर: दिखोली

11 नवंबर: सौड़

12 नवंबर: लोदाडा

13 नवंबर: भेटियारा (समापन दिवस) मेले की शुरुआत पारंपरिक रूप से श्री तामेश्वर नाग देवता के दर्शन और पूजा-अर्चना से होगी। इस बार शुभारंभ चन्द्र सिद्धि निन्ना का थोलू से किया जाएगा।मेले में क्षेत्र के प्रमुख देवी-देवताओं की डोली और निशान एकत्र होकर पूजा-अर्चना में सम्मिलित होते हैं।इनमें प्रमुख हैं — श्री गुरु चौरंगी देवता, हलुआ देवता, नागराज देवता, भैरव देवता, रूपदेव देवता, गढ़देवी माता, हुणेश्वर नाग, हरि महाराज, खंडद्वारी माता आदि।पुजारी और औतारी पारंपरिक विधि से देवपूजन करते हैं। इस दौरान औतारी व्यक्तियों पर देव अवतरण होता है, जो श्रद्धालुओं की समस्याएँ सुनकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

मुख्य आकर्षण — वीर देवता श्री हलुआ देवता

स्थानीय शिक्षक मुरली मनोहर भट्ट के अनुसार मेले का मुख्य आकर्षण वीर देवता श्री हलुआ देवता होते हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन देवता को मंडुए के आटे से बने हलुए (बाड़ी), मक्खन और दही का प्रसाद अर्पित करते हैं। लोकविश्वास है कि देवता केले के पत्ते पर रखे प्रसाद को बिना हाथ लगाए ग्रहण करते हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत दृश्य होता है।यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का उत्सव है।गांव की बेटियाँ (ध्यानियाँ) अपने ससुराल से मायके लौटकर इस मेले में सम्मिलित होती हैं।

गांववासी सभी आगंतुकों को सामूहिक अतिथि मानते हैं और पूरे क्षेत्र में सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं। इस दिन कोई व्यक्तिगत मेहमान नहीं माना जाता — सब देवता के अतिथि होते हैं।मेले की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी श्री गुरु चौरंगीनाथ देवता मेला समिति निभा रही है।अध्यक्ष: किशोरी लाल नौटियाल सभी पाँचों गांवों के प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्रामीण प्रतिनिधि समिति में शामिल हैं।समिति ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को मेले में आमंत्रित किया और सांस्कृतिक विभाग की सांस्कृतिक टीम भेजने का अनुरोध किया, जिसे जिलाधिकारी ने सहर्ष स्वीकार किया है।लगभग 200 वर्षों से निरंतर मनाया जा रहा यह त्रिवार्षिक मेला उत्तराखंड की लोकआस्था, देवसंस्कृति और सामुदायिक एकता का जीवंत उदाहरण है। गाजण क्षेत्र के लोग इसे अपनी गौरवमयी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान मानते हैं।

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