Lucknow

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की बैठक से सियासी हलचल, योगी सरकार के लिए चेतावनी?

कुशीनगर विधायक पी.एन. पाठक के लखनऊ आवास पर जुटे सत्ता पक्ष के ब्राह्मण जनप्रतिनिधि, केंद्रीय नेतृत्व तक संदेश देने की तैयारी

जन एक्सप्रेस। राज्य मुख्यालय।

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सत्ता पक्ष के ब्राह्मण विधायकों की एकजुट बैठक ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। बहरहाल कुछ ब्राह्मण विधायक विपक्षी दल के भी मौजूद रहे ब्राह्मण विधायकों की बैठक कुशीनगर जिले के महोबा विधायक पी.एन. पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर हुई। इस बैठक को महज सामाजिक संवाद मानकर नजरअंदाज करना मुश्किल है। राजनीतिक गलियारों में इसे योगी सरकार और नवनियुक्त भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के लिए एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शामिल कई विधायकों ने सरकार और प्रशासन के कामकाज को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सत्ता और प्रशासन में ब्राह्मण विधायकों की भूमिका और प्रभावशीलता पहले जैसी नहीं रह गई है। विधायकों का कहना है कि न तो उनकी बातों को गंभीरता से सुना जा रहा है और न ही जनहित से जुड़े मामलों में प्रशासन अपेक्षित सहयोग कर रहा है।

    बैठक के सियासी मायने इसलिए भी गहरे हो जाते हैं क्योंकि इससे पहले क्षत्रिय समाज के जनप्रतिनिधि भी अपनी कुटुंब बैठक कर चुके हैं। वहीं अन्य जातीय समूहों के भीतर भी असंतोष की चर्चाएं सामने आती रही हैं। विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों का इस तरह संगठित होकर बैठक करना सरकार के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।

    इस असंतोष की झलक सदन के भीतर भी दिखाई दी, जब सिद्धार्थनगर जिले के एक भाजपा विधायक सरकार और प्रशासनिक रवैये को लेकर भावुक हो गए और फफक-फफक कर अपनी पीड़ा जाहिर की। यह दृश्य सत्ता पक्ष के भीतर पनप रही बेचैनी को सार्वजनिक मंच पर उजागर करता नजर आया।

    विधायकों का आरोप है कि प्रदेश में अफसरशाही हावी हो चुकी है। थानों से लेकर जिला और मंडल स्तर तक भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही। यहां तक कि जन्मदिन और औपचारिक कार्यक्रमों में भी जनप्रतिनिधियों की जगह अफसरों का दबदबा बढ़ गया है। इससे विधायक अपने ही क्षेत्रों में हाशिये पर खड़े नजर आ रहे हैं और जनता के बीच अपनी साख को लेकर चिंतित हैं।

    बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि यही हाल रहा तो 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका सीधा असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। कई विधायकों ने संकेत दिए कि यदि संगठन और सरकार ने समय रहते उनकी बात नहीं सुनी, तो वे केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी पीड़ा पहुंचाने से पीछे नहीं हटेंगे। सूत्र बताते हैं कि ब्राह्मण विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर सकता है।

    बैठक में झांसी विधायक रवि शर्मा, देवरिया विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, मेहनौन विधायक विनय द्विवेदी, खलीलाबाद विधायक अंकुर राज तिवारी, कुशीनगर विधायक प्रकाश द्विवेदी, बांदा विधायक काशीनाथ शुक्ला, बदलापुर विधायक रमेश मिश्रा, महोबा विधायक पी.एन. पाठक, मिर्जापुर विधायक राकेश गोस्वामी और एमएलसी रत्नाकर मिश्र समेत कई प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल ब्राह्मण समाज के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और संगठन के बीच संतुलन का सवाल भी है। यदि समय रहते असंतोष के इस संदेश को नहीं समझा गया, तो आने वाले दिनों में यह सियासी चुनौती और गंभीर रूप ले सकती है।

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