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स्वाधीन सिंह हत्याकांड में नया मोड़, नाबालिग को फंसाने का आरोप; CBI जांच की मांग

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर जिले के बदलापुर क्षेत्र में चर्चित हिस्ट्रीशीटर स्वाधीन सिंह उर्फ छोटू हत्याकांड में अब एक नया और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। इस मामले में पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी बनाए गए नाबालिग आलोक मिश्रा की मां ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

जिलाधिकारी को भेजा गया प्रार्थना पत्र

आलोक मिश्रा की माता रेखा मिश्रा पत्नी अखिलेश कुमार मिश्रा ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को जौनपुर जिलाधिकारी को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से एक विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके 16 वर्षीय बेटे को इस हत्याकांड में साजिशन और निराधार रूप से फंसाया गया है।

“पुलिस ने निर्दोष को बना दिया आरोपी”

रेखा मिश्रा का कहना है कि पुलिस ने स्वाधीन सिंह की हत्या की निष्पक्ष जांच करने के बजाय एक निर्दोष किशोर को बलि का बकरा बना दिया। उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा आलोक मिश्रा ही वह व्यक्ति था, जिसने सबसे पहले स्वाधीन सिंह के परिजनों को घटना की सूचना दी थी, लेकिन बाद में पुलिस ने उसी को आरोपी बना दिया।

अवैध हिरासत का आरोप

प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने आलोक मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को घर से बुलाया था और उसे 8 जनवरी 2026 तक अवैध रूप से कोतवाली बदलापुर में बैठाए रखा। परिजनों के अनुसार, इस दौरान आलोक को न तो विधिवत गिरफ्तार दिखाया गया और न ही उसके परिजनों को सही जानकारी दी गई।

पुलिसिया खुलासे पर सवाल

पुलिस द्वारा किए गए कथित खुलासे में आलोक मिश्रा को अवैध असलहे के साथ गिरफ्तार दिखाया गया है। हालांकि परिजनों का कहना है कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत है और सच्चाई से कोसों दूर है। उनका आरोप है कि पुलिस अपनी नाकामी छिपाने के लिए झूठा केस गढ़ रही है।

CBI जांच और CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग

रेखा मिश्रा ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि स्वाधीन सिंह के वास्तविक हत्यारों का खुलासा हो सके। इसके साथ ही उन्होंने बदलापुर कोतवाली में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग की है।

उनका कहना है कि यदि 30 दिसंबर से 8 जनवरी तक की CCTV फुटेज सामने आ जाती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि आलोक पहले से ही पुलिस हिरासत में था, जिससे पुलिस की गिरफ्तारी की कहानी झूठी साबित हो जाएगी।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाबालिग को आरोपी बनाए जाने, अवैध हिरासत और कथित फर्जी बरामदगी जैसे आरोपों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

फिलहाल अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी के फैसले पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है और क्या सीबीआई जांच की मांग पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

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