निर्मल मन से ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है — रामकथा जौनपुर

जन एक्सप्रेस /जौनपुर: विकासखंड सुईथाकलां क्षेत्र के ग्राम चौबाहां स्थित हनुमान जी मंदिर परिसर में आयोजित पांच दिवसीय रामकथा के चौथे दिन शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत वातावरण देखने को मिला। कथा स्थल पर दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु भगवानराम की मर्यादा, हनुमान जी की भक्ति और धर्म के मूल सिद्धांतों को आत्मसात करने के लिए उमड़ पड़े।
कथा के मुख्य वक्ता डॉ. आर.पी. ओझा ने अत्यंत भावपूर्ण शैली में भगवान राम, बजरंगबली तथा विभिन्न देव अवतारों की दिव्य कथाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उनकी ओजस्वी वाणी और सरल व्याख्या ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हनुमान जी भक्ति, बुद्धि और बल के अद्वितीय प्रतीक
डॉ. ओझा ने कहा कि भगवान हनुमान केवल पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे विवेक, बुद्धि और निष्काम सेवा के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि हनुमान जी की भक्ति का आधार अहंकार नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण था।
कथावाचक ने कहा कि बाल्यावस्था से ही हनुमान जी ने अपनी दिव्यता का परिचय दिया। सूर्य को फल समझकर ग्रहण करने की लीला से लेकर श्रीराम के चरणों में स्वयं को समर्पित करने तक, उनका प्रत्येक कार्य भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
लंका जाकर माता सीता की खोज बनी ऐतिहासिक घटना
कथा के दौरान डॉ. ओझा ने माता सीता की खोज प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब समस्त वानर सेना निराश थी, तब हनुमान जी ने अपने भीतर छिपे सामर्थ्य को पहचान कर समुद्र लांघा और लंका पहुंचकर माता सीता का पता लगाया।
उन्होंने कहा कि यह केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि प्रभु राम पर अटूट विश्वास का परिणाम था। हनुमान जी ने लंका में श्रीराम नाम का उद्घोष करते हुए रावण की समस्त कपटपूर्ण व्यवस्था को चुनौती दी।
राम नाम से टूटता है अधर्म
कथावाचक ने कहा कि चाहे लंका की अभेद्य दुर्ग व्यवस्था हो या निशाचरों की छलपूर्ण नीति, भगवान हनुमान जी ने हर परिस्थिति में केवल “श्रीराम” नाम को अपना अस्त्र बनाया।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि—
“जिस जीवन में राम नाम बस जाता है, वहां भय, अहंकार और अधर्म स्वयं नष्ट हो जाता है।”
ईश्वर को पाने का मार्ग केवल निश्छल मन
डॉ. आर.पी. ओझा ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर को पाने का एकमात्र मार्ग निर्मल और निष्कपट मन है। दिखावा, आडंबर और स्वार्थ से की गई भक्ति ईश्वर तक नहीं पहुंचती।
उन्होंने कहा कि भगवान सदैव भक्तवत्सल होते हैं। वे भक्त की भावना देखते हैं, न कि उसकी संपन्नता या पद।
आज के युग में भी यदि व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, तो वह अवश्य ईश्वरीय कृपा का पात्र बनता है।
श्रद्धालुओं में दिखा गहरा भाव
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते नजर आए। “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। कई श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति के आंसू भी दिखाई दिए।
राजनीतिक व सामाजिक गणमान्य रहे उपस्थित
रामकथा के चौथे दिन विशेष रूप से गोसाईगंज (अयोध्या) विधायक अभय सिंह अपने समर्थकों के साथ उपस्थित रहे। साथ ही भाजपा जिला अध्यक्ष जौनपुर अजीत प्रजापति, बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी तथा क्षेत्र के अनेक समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सफल संचालन और व्यवस्था
कार्यक्रम का कुशल संचालन विजय प्रकाश तिवारी “साधू” द्वारा किया गया। मंदिर समिति एवं ग्रामीणों द्वारा श्रद्धालुओं की व्यवस्था, प्रसाद वितरण और सुरक्षा का बेहतर प्रबंध किया गया।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में तिवारी, अंगद तिवारी, अभिषेक तिवारी सीटू, भोला तिवारी, प्रमोद दुबे, राकेश मिश्रा, रणविजय सिंह दद्दू, रिंकू तिवारी, रमेश चंद तिवारी, पंकज यादव, संजय तिवारी, अवनीश विकास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
धर्म, संस्कार और समाज का संदेश
रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को मर्यादा, सेवा, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। चौथे दिन की कथा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब मन पवित्र होता है, तभी जीवन में ईश्वर का वास होता है।







