जौनपुर: कोनिया गांव भूमि विवाद में हवाई फायरिंग व मारपीट

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: मुफ्तीगंज क्षेत्र के कोनिया गांव में भूमि विवाद ने रविवार को हिंसात्मक रूप धारण कर लिया, जिसमें एक पक्ष द्वारा हवाई फायरिंग की गई और दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडों से भी जमकर मारपीट हुई। इस हिंसात्मक झड़प में दूसरे पक्ष के सदस्य मनोज यादव गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले को संज्ञान में लेकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोनिया गांव की यादव बस्ती में भूमि और आवादी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद का केंद्र वह जमीन है जिस पर लंबे समय से दोनों पक्षों का दावा था। विवाद के चलते पहले भी पिकेता दर्ज हो चुका है और पंचायत स्तर पर भी निपटारा प्रयास किए गए, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया।
बताया जाता है कि गत बुधवार को विवाद और तूल पकड़ गया जब जमीन पर नींव खोदकर मकान निर्माण की कार्रवाई शुरू हो गई। जहां मुन्ना यादव द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा था, वहीं इसके खिलाफ सत्यदेव यादव और उसके समर्थकों ने विरोध जताया। विरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और मामला जल्द ही हिंसक हो गया।
इतनी ही नहीं, कथित रूप से विवाद को बढ़ता देख मुन्ना यादव की ओर से तीन-चार राउंड हवाई फायरिंग भी की गई। इस दौरान गोलियों के चकरा की आवाज से गांव में अफरातफरी मच गई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस संघर्ष में सत्यदेव यादव के भाई मनोज यादव को चोट आई, जिसकी हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही केराकत कोतवाली तथा मुफ्तीगंज चौकी पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए त्वरित कार्रवाई की। घायल मनोज यादव को प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं घटना में शामिल पात्रों को हिरासत में लेने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस विभाग के सूत्रों ने बताया कि घटना में हवाई फायरिंग तथा लाठी-डंडों से उत्पन्न हिंसा को कानून अपराधों की श्रेणी में लिया गया है। इस मामले में मुन्ना यादव तथा सत्यदेव यादव के खिलाफ नामजद मु0अ0सं0 दर्ज कर आगामी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब साक्ष्य, वीडियो फुटेज और स्थानीय गवाहों के बयान से घटना की विस्तृत पड़ताल कर रही है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और दोनों पक्षों को अलग-अलग थाने बुलाकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी भी बढ़ा चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसात्मक घटनाएं न केवल गांव की सामाजिक शांति को प्रभावित करती हैं, बल्कि कानून और व्यवस्था को भी चुनौती देती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाती है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने भी चिंता जताई है कि यदि इस तरह के विवाद समाधान के बजाय उग्र रूप लेते रहे तो इसका नुकसान पूरे समुदाय को उठाना पड़ सकता है। कुछ स्थानीय बुजुर्गों ने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि इस तरह के विवादों का शीघ्र और न्यायसंगत समाधान किया जाए ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना की पुनरावृति न हो।
जब बात आगे बढ़ी गई तो पोलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जल और भूमि विवाद जैसे मामलों में पक्षकारों को कानून द्वारा उपलब्ध कराये गये समाधान के तरीकों का पालन करना चाहिए, बजाय हिंसा की ओर उन्मुख होने के। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपनी बात कोर्ट या स्थानीय पंचायत में शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है, लेकिन हथियारों, हवाई फायरिंग या मारपीट से किसी भी समस्या का समाधान संभव नहीं है।
घटना के मुख्य आरोपियों पर अभी अग्रिम कानूनी कार्रवाई जारी है। ग्रामीणों ने बताया कि आगे से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वे भी प्रशासन और पुलिस से सहयोग करने को तैयार हैं। पुलिस ने अल्टीमेटम भी जारी किया है कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की हिंसा की कोई भी रिपोर्ट मिलती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।







