शादी की शहनाई, जाम की चीख और एम्बुलेंस की बेबसी
क्या NHAI सिर्फ टोल वसूलने के लिए ही है?

जन एक्सप्रेस/लखनऊ।
शादियों का सीजन आते ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चारों ओर बने राष्ट्रीय राजमार्ग जश्न के नहीं, जाम के हाईवे बन जाते हैं।
रायबरेली रोड, उन्नाव रोड, सीतापुर हाईवे, हरदोई मार्ग, अयोध्या मार्ग और सुल्तानपुर रोड- हर दिशा से राजधानी में प्रवेश करते ही आम नागरिक को एक ही हकीकत से रूबरू होना पड़ता है: घंटों का जाम और सिस्टम की शर्मनाक चुप्पी।
हाईवे पर होटल–रिसोर्ट की फसल, परमिशन मोटी रकम पर
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बड़े-बड़े होटल, रिसोर्ट और मैरिज लॉन खड़े कर दिए गए।
बिना पर्याप्त पार्किंग, बिना ट्रैफिक मैनेजमेंट और बिना किसी वैकल्पिक योजना के इन्हें संचालन की अनुमति दे दी गई।
मोहनलालगंज (रायबरेली रोड) – शादी समारोह के चलते कई-कई घंटे जाम।
अयोध्या मार्ग – बाराबंकी से आगे सफेदाबाद से लेकर सड़क के दोनों तरफ महगें-महंगे होटल, रिसोर्ट के बाहर जाम के झाम से लोगों का सामना होता रहता है।
बिजनौर–सुशांत गोल्फ सिटी (सुल्तानपुर हाईवे) – रिसोर्ट्स के बाहर हाईवे पर खड़ी गाड़ियाँ
इंदिरा नगर–सीतापुर रोड – मैरिज लॉन के बाहर सड़क पर बारात
उन्नाव रोड (नवाबगंज क्षेत्र) – होटल आयोजनों के कारण बार-बार ट्रैफिक ठप
NHAI से सवाल: क्या आपकी जिम्मेदारी टोल बूथ पर खत्म हो जाती है?
राष्ट्रीय राजमार्गों पर जाम की इस भयावह स्थिति के बावजूद NHAI पूरी तरह खामोश नजर आता है।
जब-
* टोल प्लाजा से पूरी वसूली की जाती है
* सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जाता है
* तो सवाल यह है कि ट्रैफिक की जिम्मेदारी किसकी है?
अगर NHAI को यह नहीं दिख रहा कि-
* हाईवे पर शादी समारोह के कारण जानलेवा जाम लग रहे हैं
* एम्बुलेंस फंसी हुई हैं
* लोग हॉस्पिटल नहीं पहुंच पा रहे
तो फिर ऐसे टोल प्लाजा को बंद क्यों नहीं कर दिया जाना चाहिए?
एम्बुलेंस में तड़पते मरीज, बाहर नाचती बारात
यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, यह मानवता पर तमाचा है।
जाम में फंसी एम्बुलेंस। अंदर सायरन बजता रहता है
मरीज तड़पता रहता है। बाहर नशे में झूमती बारात सड़क पर कब्जा जमाए रहती है
कई मामलों में मरीज हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं, लेकिन न पुलिस हरकत में आती है, न प्रशासन, न NHAI
उल्टी दिशा से भी रास्ता नहीं, फिर आपातकाल कैसे निकले?
* हालात इतने बदतर हैं कि कई जगह-
न सीधी लेन चलती है
* न उल्टी दिशा से निकलने की जगह बचती है
तो सवाल है- अगर किसी की जान चली जाए, तो जिम्मेदार कौन होगा?
ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन और NHAI-तीनों मौन
यह जाम किसी एक विभाग की गलती नहीं, बल्कि-
* जिला प्रशासन की अनुमति नीति
* ट्रैफिक पुलिस की निष्क्रियता
* और NHAI की लापरवाही
तीनों का संयुक्त परिणाम है।
जन एक्सप्रेस पूछता है
* क्या NHAI केवल टोल वसूलने वाली एजेंसी बनकर रह गई है?
* क्या हाईवे पर शादी समारोह की अनुमति देना नियमों का खुला उल्लंघन नहीं?
* क्या किसी की मौत के बाद ही सिस्टम जागेगा?
अगर अब भी-
बिना पार्किंग वाले मैरिज लॉन सील नहीं हुए
हाईवे पर बारात निकालने पर सख्ती नहीं हुई
NHAI से जवाबदेही तय नहीं हुई
तो अगला जाम सिर्फ ट्रैफिक नहीं, किसी परिवार का मातम होगा।







