
जन एक्स्प्रेस।देहरादून।उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर एक वाहन स्वामी को सभी दस्तावेज़ वैध होने के बावजूद ₹5,000 का चालान थमा दिया गया। मामला सामने आने के बाद ई-चालान प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।जानकारी के अनुसार, हरिद्वार निवासी डॉ. अनुराग 3 फरवरी 2026 को अपनी कार से देहरादून-हरिद्वार मार्ग पर स्थित लच्छीवाला टोल प्लाज़ा से होकर गुजर रहे थे। यात्रा के दौरान किसी प्रकार की चेकिंग नहीं हुई और न ही मौके पर कोई आपत्ति जताई गई। लेकिन अगले दिन 4 फरवरी को उनके मोबाइल पर एक ई-चालान संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें उनके वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट अमान्य बताते हुए ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया।
फिटनेस सर्टिफिकेट पूरी तरह वैध
डॉ. अनुराग का कहना है कि उन्होंने अपनी कार का फिटनेस सर्टिफिकेट दिसंबर 2025 में ही एक वर्ष के लिए नवीनीकरण करा लिया था। वाहन के सभी कागज़ — रजिस्ट्रेशन, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और फिटनेस सर्टिफिकेट — पूरी तरह वैध और अपडेट थे। इसके बावजूद उन्हें गलत आधार पर चालान भेज दिया गया।डॉ. अनुराग ने इस कार्रवाई को मनमाना और तकनीकी लापरवाही का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि यदि आम नागरिक अपने सभी दस्तावेज़ सही रखने के बाद भी ऐसे चालानों का सामना करेगा, तो यह व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करता है।
RTO कार्यालय में दर्ज कराई शिकायत
गलत चालान मिलने के बाद डॉ. अनुराग ने संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) देहरादून में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने चालान निरस्त करने और जमा की गई राशि वापस किए जाने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि ऐसी तकनीकी खामियों को जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में अन्य वाहन चालकों को परेशानी न झेलनी पड़े।
RTO प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए देहरादून आरटीओ प्रशासन के अधिकारी संदीप सैनी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह चालान तकनीकी त्रुटि या सिस्टम की गलती से जारी हुआ है, तो उसे निरस्त किया जाएगा और आगे ऐसी गलती न हो, इसके लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
ई-चालान सिस्टम पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर ई-चालान व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है। तकनीक के सहारे यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की मंशा तो सही है, लेकिन गलत डेटा फीडिंग या सिस्टम अपडेट में देरी आम लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानी में डाल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि परिवहन विभाग को चालान जारी करने से पहले डेटा सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करना चाहिए, ताकि निर्दोष वाहन मालिकों को बेवजह परेशान न होना पड़े।देहरादून का यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा है। यदि सभी दस्तावेज़ सही होने के बावजूद चालान कट रहे हैं, तो यह डिजिटल व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद परिवहन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आम जनता को कब राहत मिलती है।






