UGC विरोध प्रदर्शन: पंकज धवरैय्या से मिलने जा रहे अधिवक्ताओं को पुलिस ने रोका, कोतवाली में हुई तीखी नोकझोंक

जन एक्सप्रेस/हाथरस: UGC के विरोध में चल रहे आंदोलन को लेकर शनिवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब धरने पर बैठे पंकज धवरैय्या से मिलने जा रहे अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। मामला बढ़ता देख पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को कोतवाली ले जाकर रोक दिया, जहां बाद में कोतवाली प्रभारी को एक ज्ञापन सौंपा गया।
बताया जा रहा है कि पंकज धवरैय्या लंबे समय से UGC के प्रस्तावित नियमों और नीतियों के विरोध में धरने पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि नए नियम छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं। इसी क्रम में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात कर समर्थन जताने और उनकी स्थिति की जानकारी लेने के लिए जा रहा था।
लेकिन जैसे ही अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल धरना स्थल की ओर बढ़ा, पुलिस ने उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रोक दिया। इस बात को लेकर अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया। मौके पर पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तीखी बहस हुई, जो कुछ देर तक चलती रही।
अधिवक्ताओं का कहना था कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से पंकज धवरैय्या से मिलने जा रहे थे और किसी भी तरह की कानून व्यवस्था भंग करने का उनका कोई इरादा नहीं था। इसके बावजूद पुलिस द्वारा उन्हें रोका जाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
स्थिति को नियंत्रित करने के बाद पुलिस अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को कोतवाली ले गई, जहां उन्होंने कोतवाली प्रभारी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने मांग की कि पंकज धवरैय्या को धरना स्थल पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
अधिवक्ताओं ने विशेष रूप से प्रशासन से मांग की कि पंकज धवरैय्या के लिए टेंट की उचित व्यवस्था की जाए, साथ ही पानी, शौचालय और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएं। उनका कहना था कि लंबे समय से चल रहे धरने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जो मानवाधिकारों के खिलाफ है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो वे न्यायिक और संवैधानिक रास्ते अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
इस प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से एडवोकेट कृष्णकांत शर्मा (केके), कपिल मोहन गौड़, मनोज शर्मा, आशीष उपाध्याय सहित कई अन्य अधिवक्ता शामिल थे। सभी अधिवक्ताओं ने एक स्वर में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अलोकतांत्रिक बताया।
वहीं दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियातन उठाया गया है। पुलिस के अनुसार, किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति से बचने के लिए अधिवक्ताओं को धरना स्थल तक जाने से रोका गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में पुलिस सतर्क बनी हुई है। UGC के विरोध में चल रहा धरना और उससे जुड़ी गतिविधियां लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।






