
जन एक्सप्रेस / मानिकपुर :- चित्रकूट जनपद के मानिकपुर स्थित जयप्रकाश आश्रम पद्धति विद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला विद्यालय में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता से जुड़ा है। आरोप है कि छात्रों को लंबे समय से गुणवत्ताहीन भोजन परोसा जा रहा था, जिससे नाराज छात्र-छात्राएं सोमवार सुबह सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज कराई।
बच्चों ने जिलाधिकारी के समक्ष बताया कि विद्यालय में मिलने वाला भोजन न तो गुणवत्तापूर्ण है और न ही स्वास्थ्य के अनुकूल। उनका कहना है कि खराब भोजन के कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्रों की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजा गया।
जांच पर उठे सवाल
विद्यालय पहुंचे समाज कल्याण अधिकारी ने मामले की जांच की, लेकिन स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि पूरी कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई। उनका कहना है कि वास्तविक समस्या की गंभीरता से जांच करने के बजाय मामले को जल्दबाजी में निपटाने का प्रयास किया गया।
जब अधिकारियों से भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर सवाल किए गए तो उनका जवाब था कि रसोइयों के बीच हुए विवाद के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि इस जवाब से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
कौन लेगा जिम्मेदारी?
यदि भोजन व्यवस्था रसोइयों के विवाद के कारण प्रभावित हुई, तो विद्यालय प्रशासन और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों ने समय रहते व्यवस्था क्यों नहीं संभाली? छात्रों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना विद्यालय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में बच्चों को अपनी शिकायत लेकर सीधे जिलाधिकारी के पास जाना पड़ा, जो व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि आश्रम पद्धति विद्यालयों की स्थापना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा, आवास और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। यदि भोजन जैसी बुनियादी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है, तो यह पूरे तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भी बच्चों के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ इसी तरह की लापरवाही जारी रह सकती है।
फिलहाल प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में लापरवाही या भोजन की गुणवत्ता में कमी की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।






