उत्तर प्रदेशबहराइचहेल्थ

बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त, बीमार शिशुओं का कैसे हो उपचार

जन एक्सप्रेस/राहुल उपाध्याय

बहराइच। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्दा में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती अभी तक नहीं की गई है। जबकि प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में बाल रोगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं इलाज के अभाव में परिजनों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है ऐसी दशा में लोगों को काफी खर्च वहन करना पड़ता है खासकर नवजात शिशु के स्वास्थ्य को लेकर महकमा गंभीर नहीं है।

विकासखंड नवाबगंज में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरदा के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रुपईडीहा, बाबागंज, चौगोडवा है। विकास खंड की स्वास्थ्य महकमे के मुताबिक आबादी करीब ढाई लाख है। इस पूरे इलाके में प्रतिदिन दर्जनों बाल रोगी के परिजन इलाज करने के लिए उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केदो पर भी बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं है। महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर है तो जरूर, लेकिन उनका चेहरा स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक और कर्मचारी पहचानते ही नहीं। महिला चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित चल रही हैं। प्रसव पीड़ित महिलाओं को चिकित्सक न होने की दशा में काफी कठिनाइयों उठानी पड़ती हैं। महिलाओं की डिलीवरी आशा बहू और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम कराती हैं।

बच्चों के जन्म के बाद तत्काल उसके स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाना अनिवार्य होता है। कभी-कभी जन्म के बाद शिशु पीलिया जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में इनका उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात फिजिशियन ही करते हैं। गंभीर हालत होने पर जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है। जिससे प्रसव पीड़ित महिला और उनके परिजनों को काफी कठिनाइयों उठानी पड़ती हैं। कारण यह है कि जिला मुख्यालय की दूरी 60 किलोमीटर के करीब है। और रात की स्थिति में साधन मिल पाना नामुमकिन रहता है। इसके बावजूद जीरो से 5 साल तक के बच्चों के बीमारी से ग्रस्त होने पर उनका इलाज भी फिजिशियन के द्वारा ही किया जाता है। अक्सर बच्चों की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों के पास जिला चिकित्सालय रेफर करने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अधीक्षक डॉक्टर आर एन वर्मा का कहना है कि बाल रोग चिकित्सक की तैनाती के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्राचार किया गया है। चिकित्सक की उपलब्धता होने पर तैनाती किए जाने का आश्वासन सीएमओ की ओर से दिया गया है।

ग्रामीण इलाकों से लोग उपचार के लिए आते है़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्दा में बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त चल रहा हैं। इसके चलते मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पडता है। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को उपचार के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं।

नवाबगंज ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बाल रोग विशेषज्ञ न होने से बीमार बच्चों के साथ तीमारदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। बच्चों के बीमार होने पर परिजनों को उपचार के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार हालत गंभीर होने पर मरीज को राजधानी रेफर कर दिया जाता है। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों की सूचना स्वास्थ्य निदेशालय को भेजी गई है। इन पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से संभव है। बच्चों के बीमार होने पर परिजना को जिला अस्पताल की दौड़ लगाना मजबूरी बन गई हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्दा में बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। बच्चों के स्वास्थ्य जांच के लिए लोगों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।

हालांकि जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ हैं। सीएचसी में बेहतर सुविधाएं नहीं होने से लोगों की निर्भरता जिला अस्पताल पर अधिक है। बच्चों की सेहत को लेकर भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। सीएचसी चर्दा में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने से लोगों को 60 किमी की दूरी तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। सीएचसी में बच्चों का इलाज नहीं हो पा रहा, क्योंकि यहां शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। स्वीकृत पदों के विपरीत एमबीबीएस डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिल रहा हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button