हाथरस के सिकंदराराऊ में पुराने स्वास्थ्य केंद्र के कूड़े से कोडीन युक्त कफ सिरप का जखीरा मिला

जन एक्सप्रेस/हाथरस: सउत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। हाथरस के सिकंदराराऊ कस्बे में स्थित पुराने सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर इमारत के भीतर कूड़े के ढेर से भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने जब पुराने स्वास्थ्य केंद्र परिसर में फैले कूड़े के ढेर में बड़ी संख्या में दवाइयों की बोतलें देखीं, तो तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंची टीम ने जब जांच की, तो पाया गया कि ये सामान्य कफ सिरप नहीं, बल्कि कोडीन युक्त कफ सिरप हैं, जो नशे की श्रेणी में आते हैं और जिनकी बिक्री व उपयोग पर सख्त नियंत्रण होता है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि कूड़े में फेंकी गई इन कफ सिरप की बोतलों पर 2029 तक की एक्सपायरी डेट दर्ज है। यानी इन दवाइयों की वैधता अभी करीब तीन साल से ज्यादा बाकी है। इसके बावजूद इन्हें इस्तेमाल या नियमानुसार नष्ट करने के बजाय खुलेआम कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया।
बरामद कफ सिरप का नाम “कोडिस्टार एनएफ” बताया जा रहा है, जो कोडीन फॉस्फेट युक्त है। यह दवा केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही दी जाती है और इसका गलत इस्तेमाल बच्चों और युवाओं में नशे की लत का बड़ा कारण बन चुका है।
इस पूरे मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हाल ही में राजस्थान में कोडीन युक्त सिरप पीने से कई बच्चों की मौत का मामला सामने आया है, जिसकी जांच अभी जारी है। ऐसे में हाथरस में इस तरह बड़ी संख्या में कोडीन सिरप का खुले में मिलना सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
जैसे ही यह मामला स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आया, विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सील कर दवाइयों को कब्जे में लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि ये दवाइयां किसकी थीं, कहां से आईं और इन्हें कूड़े में क्यों फेंका गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुराने स्वास्थ्य केंद्र की इमारत काफी समय से उपेक्षा का शिकार है और यहां आए दिन असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। ऐसे में कोडीन जैसी संवेदनशील दवाओं का यहां मिलना बेहद खतरनाक साबित हो सकता था।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं यह मामला दवा माफिया, स्टॉक की हेराफेरी या सरकारी लापरवाही से जुड़ा तो नहीं है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन सिरप को जानबूझकर नष्ट करने के उद्देश्य से यहां फेंका गया या फिर किसी गड़बड़ी को छुपाने की कोशिश की गई।
फिलहाल, बरामद सभी कफ सिरप को सुरक्षित स्थान पर रखकर सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं और पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
हाथरस से इस वक्त की बड़ी खबर में बस इतना ही। प्रशासन पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि दोषियों पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।






