एक बोरी खाद के लिए त्राहि-त्राहि! भूखे-प्यासे किसान, बेखबर प्रशासन
मुख्यमंत्री कहें 'कोई कमी नहीं', अधिकारी दें 'सब ठीक है' का राग — लेकिन खेतों में पसीना बहाने वाला किसान सुबह से लाइन में बेहोश हो रहा है!

जन एक्सप्रेस / राजापुर :चित्रकूट(हेमनारायण हेमू)- चित्रकूट जिले में इन दिनों हालात ऐसे हैं कि मानो किसी युद्ध का मंजर हो — लेकिन यह युद्ध किसी और का नहीं, किसान का है, अपनी ही जमीन पर, अपने ही हक के लिए। खाद पाने के लिए जिले की कई सोसाइटी में किसानों का जमावड़ा इस कदर उमड़ा कि व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। भूखे-प्यासे, सूरज की तपिश में तपते किसान, एक बोरी खाद के लिए घंटों कतार में खड़े रहे और अंत में मिली सिर्फ मायूसी।
कहां हैं नेता? कहां है प्रशासन?
हर छोटी-बड़ी सभा में मंच लूटने वाले जनप्रतिनिधि, और हर शवयात्रा में राजनीति खोजने वाले नेता — आज गायब हैं। कैमरों के सामने किसानों की कसम खाने वाली सरकार, अब जब किसान सड़क पर है, तो सबका ज़मीर सो गया है।
“खाद नहीं, खाक व्यवस्था — किसान बेहाल, खेत बंजर!”
मानिकपुर की लोहदा और राजापुर सोसाइटी में हालात सबसे ज्यादा खराब।
किसानों के लिए पीने तक का पानी नहीं, छांव की कोई व्यवस्था नहीं।
प्रशासन बार-बार कह रहा है — “खाद पर्याप्त है”, लेकिन लाइन में खड़ा किसान बता रहा है सच्चाई।
वीडियो वायरल हो रहे हैं, लोग सोशल मीडिया पर दर्द बयां कर रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग गहरी नींद में।
“एक बोरी खाद की कीमत अफसर क्या जानें?”
सरकार दावा करती है कि “किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा”, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। किसान कह रहा है:
हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि हम किसान हैं। दिन-रात मेहनत करते हैं, पेट भरते हैं देश का, लेकिन खुद के लिए खाद तक नहीं मिलती।”
बुआई का समय निकला जा रहा है, लेकिन खाद के बिना खेत बंजर हो रहे हैं। किसान की आंखों में चिंता है, होठों पर प्यास, और पेट में भूख — लेकिन हाथ में कुछ नहीं।
“किसानों के साथ यह अन्याय कब तक?”
अब सवाल बड़ा है:
आखिर खाद वितरण की व्यवस्था क्यों फेल हो रही है?
सोसाइटी में भीड़ नियंत्रण और समय पर सप्लाई क्यों नहीं हो रही?
पीने के पानी, छांव और प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था क्यों नहीं?”अगर यही हाल रहा, तो आने वाले कल में खेत सूने होंगे, अनाज महंगा होगा और फिर वही सरकार हाथ मलती रह जाएगी!”






