2027 की सियासी बिसात बिछाने की तैयारी जुटी भाजपा
संतोष कुमार दीक्षित
जन एक्सप्रेस। राज्य मुख्यालय
भारतीय जनता पार्टी में पिछले कई महीनों से चल रही सियासी उठापटक और गहन मंथन के बाद आखिरकार जिस नाम पर सहमति बनी, वह हैं महाराजगंज के सात बार के सांसद और मोदी सरकार में दूसरी बार मंत्री बने पंकज चौधरी। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चली मैराथन बैठकों के बाद पार्टी नेतृत्व ने जिस ‘अमृत’ को निकाला, उसमें पंकज चौधरी का नाम सबसे ऊपर रहा।
पंकज चौधरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में गिना जाता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से यह चर्चा आम रही है कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधी खेमे से जोड़ा जाता है। इसके पीछे तर्क दिया जाता रहा है कि गोरखपुर से अलग होकर महाराजगंज लोकसभा सीट बनने के बाद से पंकज चौधरी लगातार सात बार सांसद चुने गए, जबकि यह क्षेत्र योगी आदित्यनाथ का मजबूत गढ़ माना जाता है। हालांकि, जमीनी सच्चाई इससे इतर भी रही है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पंकज चौधरी ने गोरखनाथ मंदिर जाकर उन्हें बधाई दी थी। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगी आदित्यनाथ स्वयं पंकज चौधरी के घर भी पहुंचे थे। ऐसे में तथाकथित विरोध की जो तस्वीर पेश की जाती रही, वह उतनी स्पष्ट कभी नजर नहीं आई।
प्रदेश अध्यक्ष के चयन से पहले घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली से लौटे, लेकिन इसके बाद भी संगठन महामंत्री बीएल संतोष लखनऊ पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एकांत में लंबी मुलाकात की और फिर देर शाम संगठन की अहम बैठक हुई, जो देर रात तक चली। माना जा रहा है कि यही वह मैराथन बैठक थी, जिसमें पंकज चौधरी की ताजपोसी पर अंतिम मुहर लगी।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा का यह फैसला केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह सियासी रणनीति का हिस्सा है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट तैयार करने में जुटी है। साथ ही कुर्मी मतदाताओं को विपक्ष की ओर खिसकने से रोकना भी भाजपा की बड़ी प्राथमिकता है। पंकज चौधरी की ताजपोसी को इसी सामाजिक संतुलन और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बनाना भी इस फैसले का अहम पहलू माना जा रहा है। भाजपा का एक बड़ा धड़ा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुछ क्रियाकलापों से नाराज बताया जाता है। हालांकि, पार्टी यह भी मानती है कि योगी आदित्यनाथ को हटाना न तो संभव है और न ही पार्टी हित में। ऐसे में योगी विरोधी माने जाने वाले खेमे से आने वाले पंकज चौधरी को संगठन की कमान सौंपकर उस नाराजगी को कम करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, लंबे समय से चले मंथन के बाद भाजपा ने जिस नाम पर भरोसा जताया है, वह हैं महाराजगंज जिले के लाल पंकज चौधरी। अब देखना होगा कि यह सियासी प्रयोग 2027 के रण में भाजपा के लिए कितना असरदार साबित होता है।
महाराजगंज के जनप्रिय नेता पंकज चौधरी: सादगी, अनुभव और संगठन से जुड़ाव की कहानी
उत्तर प्रदेश की सियासत में पंकज चौधरी एक ऐसा नाम है, जिसने लगातार चुनावी सफलता और क्षेत्रीय जुड़ाव के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। 20 नवंबर 1964 को जन्मे पंकज चौधरी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं और वर्तमान में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। जून 2024 में वे 18वीं लोकसभा के लिए सातवीं बार सांसद चुने गए और एक बार फिर महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर जमीन से जुड़ा रहा है। सादगीपूर्ण जीवनशैली और सहज व्यवहार उनकी पहचान है। राजनीति में आने के बाद से उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता दी और लगातार जनता के बीच मौजूद रहकर भरोसे का रिश्ता बनाया। यही वजह है कि महाराजगंज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। क्षेत्र के विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक सरोकारों को लेकर वे हमेशा सक्रिय रहे हैं।
संसदीय स्तर पर भी पंकज चौधरी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। 13 सितंबर 2019 को उन्हें रेल संबंधी स्थायी समिति का सदस्य बनाया गया। इसके साथ ही वे ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय की परामर्शदात्री समितियों से भी जुड़े रहे। इन जिम्मेदारियों के जरिए उन्होंने ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया।
7 जुलाई 2021 से 9 जून 2024 तक और फिर 11 जून 2024 से पुनः उन्हें वित्त मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह जिम्मेदारी उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण मानी जाती है। वित्त मंत्रालय जैसे अहम विभाग में रहते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाई।
भले ही संगठनात्मक राजनीति में उन्हें बहुत लंबा अनुभव न माना जाए, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और आम जनता से उनके संबंध मजबूत हैं। अपने संसाधनों और कार्यशैली के बल पर वे हमेशा क्षेत्र में मौजूद रहते हैं और लोगों की समस्याओं को सीधे सुनते हैं। यही कारण है कि चुनावी राजनीति में उनकी सफलता का सिलसिला लगातार जारी है।
कुल मिलाकर, पंकज चौधरी एक ऐसे नेता हैं जिनकी राजनीति का आधार सादगी, जनसंपर्क और अनुभव है। महाराजगंज ही नहीं, बल्कि प्रदेश और केंद्र की राजनीति में भी उनकी भूमिका आने वाले समय में और अहम मानी जा रही है।
जौनपुर से महाराजगंज तक: प्रदेश भाजपा को मिला नया कप्तान
जन एक्सप्रेस। लखनऊ प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बनाए गए पंकज चौधरी का नाता जौनपुर जिले की केराकत तहसील से जुड़ा होने की खबर से जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। बताया जाता है कि श्री चौधरी मूल रूप से केराकत तहसील के एक गांव के निवासी रहे हैं। उनके पूर्वज आज भी जौनपुर में रह रहे हैं, जिससे जिले का उनसे भावनात्मक जुड़ाव बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार पंकज चौधरी के पिता व्यवसाय के सिलसिले में पूर्वांचल के महाराजगंज चले गए थे। वहीं से परिवार की आगे की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा शुरू हुई। बाद में पंकज चौधरी ने महाराजगंज को कर्मभूमि बनाया और वहीं से राजनीति में कदम रखते हुए लंबा सफर तय किया। लगातार कई बार सांसद चुने जाने के साथ ही उन्होंने संगठन और सरकार दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई।
प्रदेश भाजपा की कमान संभालने की जिम्मेदारी मिलने की खबर जैसे ही जौनपुर पहुंची, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। केराकत सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने इसे जौनपुर के लिए गौरव का क्षण बताया। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिले से जुड़ा नेता प्रदेश अध्यक्ष बना है, इससे जौनपुर को नई पहचान मिली है। मिठाइयां बांटी गईं और एक-दूसरे को बधाइयां दी गईं।
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