उत्तर प्रदेशलखनऊ

बिजली निजीकरण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान

अभियंताओं ने कहा- निजीकरण किसी कीमत पर स्वीकार नहीं, स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपना असंवैधानिक

जन एक्सप्रेस लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों और अभियंताओं ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के मंथन शिविर में यह स्पष्ट कर दिया गया कि निजीकरण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।वहीं, आगामी दिवाली पर्व पर बिजली आपूर्ति सुचारु रखने का संकल्प भी अभियंताओं ने दोहराया, ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो।

निजीकरण पर सर्वसम्मति से विरोध, आंदोलन होगा तेज

मंथन शिविर में अभियंताओं ने पॉवर कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर और निजीकरण के नाम पर उपभोक्ताओं का शोषण किया जा रहा है। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगमों के निजीकरण पर दिए गए तीनों विकल्पों को सर्वसम्मति से खारिज करने की घोषणा की।संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर, आलोक श्रीवास्तव, जगदीश पटेल आदि ने लखनऊ जैसे शहरों में फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए बिजली व्यवस्था चलाने की आलोचना की और इसे लूट की छूट बताया।

दिवाली पर बिजली रहेगी चालू, लेकिन लड़ाई भी जारी

संघ ने 16 अक्टूबर को सभी जिलों में आमसभा बुलाने का निर्णय लिया है, जिससे विरोध को जनांदोलन में बदला जा सके।
हालांकि, अभियंताओं ने यह आश्वस्त किया कि दिवाली के अवसर पर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी और उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाया जाएगा।स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर भी घमासान, बताया असंवैधानिक प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य रूप से लागू करने के खिलाफ भी जोरदार विरोध सामने आया है।राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड का विकल्प चुनने का अधिकार है, लेकिन बिजली कंपनियां इसे जबरन थोप रही हैं।अब तक 43.44 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं ,इनमें से 20.69 लाख मीटर उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना प्रीपेड कर दिए गएउपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर बरगलाया जा रहा है

कानून की अनदेखी पर चेतावनी, नियामक आयोग से हस्तक्षेप की मांग

अध्यक्ष वर्मा ने कहा कि विधेयक 2025 में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो स्मार्ट मीटर को अनिवार्य करता हो। इसलिए कंपनियों की यह मनमानी उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।उन्होंने विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि:जबरन मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए चेक मीटर घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी हों

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