जौनपुर में सड़क घोटाले पर सियासी संग्राम: विधायक-ठेकेदार आमने-सामने
जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव को भेजी रिपोर्ट, घटिया निर्माण पर ठेकेदारों पर कार्रवाई की सिफारिश

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए गए ग्रामीण संपर्क मार्गों में घटिया निर्माण को लेकर सियासी भूचाल आ गया है। बदलापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रमेश चंद्र मिश्र की शिकायत पर सात सड़कों की जांच कराई गई, जिनमें से तीन मार्गों पर घटिया सामग्री का प्रयोग और मानकों की अनदेखी की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी द्वारा प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट में ठेकेदार के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
जाँच में दोषी पाए गए मार्ग
1. बेसार संपर्क मार्ग
2. भटौली से पडरी मार्ग
3. मिरशादपुर, सरोज बस्ती, मियां बस्ती, केवट बस्ती में विशेष मरम्मत कार्य
इन कार्यों में निर्माण मानकों का घोर उल्लंघन पाया गया। मौके पर जांच टीम के साथ अभियंता व अन्य तकनीकी स्टाफ मौजूद रहे।
ठेकेदारों का पलटवार: विधायक पर लगे ‘कमीशन’ के आरोप
जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही ठेकेदार बिंदु सिंह और उनके सहयोगी कौशल किशोर सिंह ने सोशल मीडिया पर विधायक पर कमीशन मांगने और रिश्तेदारों को ठेका दिलाने के आरोप लगाए।
मामला यहीं नहीं रुका – कौशल किशोर सिंह की बहू ने जिलाधिकारी को पत्र भेजते हुए सवाल उठाया कि जब कौशल सिंह पर वाराणसी में गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और बिंदु सिंह पर आरएसएस के वरिष्ठ स्वयंसेवक की हत्या का मुकदमा दर्ज है, तो ऐसे व्यक्तियों को चरित्र प्रमाणपत्र कैसे जारी हो गया?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई?
भाजपा में दरार: दो गुटों में खुला टकराव
इस पूरे प्रकरण के बाद भाजपा के अंदर की फूट अब सतह पर है। पार्टी के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक गुट द्वारा शिकायतें सीधे प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँचाई गई हैं।
सूत्रों का दावा है कि यदि समय रहते मामला नहीं सुलझाया गया तो इसका सीधा असर 2027 विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
क्या यही है ‘डबल इंजन’ की सच्चाई?
प्रदेश में पीडब्ल्यूडी के कार्यों को लेकर हर जिले में घटिया निर्माण की शिकायतें आम हो गई हैं। ऐसे में सवाल उठते हैं:क्या यह मामला सिर्फ सियासी बदले की कार्रवाई है या सच्चा भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है?
ठेकेदारों ने पहले क्यों नहीं उठाई आवाज?
क्या चुनाव नजदीक आने पर अब यह रणनीतिक हमला बन गया है?
विधायक का जवाब: ‘बेलो टेंडर डालकर सरकार को बदनाम करने की साजिश’
जन एक्सप्रेस से बात करते हुए विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने कहा,
> “यह मोदी-योगी की सरकार है, भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कुछ लोग बेलो टेंडर डालकर जानबूझकर घटिया निर्माण कर रहे हैं और सरकार की छवि खराब करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लंघन करने वाले हर व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
नेतृत्व की अग्निपरीक्षा और जनता की नजरें
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
ठेकेदारों और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या भाजपा आंतरिक मतभेदों को सुलझा पाएगी?
क्या चरित्र प्रमाणपत्र घोटाले की भी होगी निष्पक्ष जांच?
फिलहाल पूरे प्रदेश में ठेकेदारों द्वारा बेलो टेंडर डालकर निर्माण कार्यों में धांधली के आरोप लगते रहे हैं, और यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है। यह मामला भाजपा सरकार की ‘विकास की साख’ और ‘शासन की पारदर्शिता’ दोनों के लिए लिटमस टेस्ट बन चुका है।
बहरहाल हमारी यह रिपोर्ट जनता के सामने उन सवालों को रखने की कोशिश है, जिन पर जवाब आने बाकी हैं। चुनावी रण से पहले यदि पार्टी ने आत्ममंथन नहीं किया, तो यह घोटाला राजनीतिक विस्फोट में तब्दील हो सकता है।






