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यूपी रेरा की बड़ी उपलब्धि: हजारों होम बायर्स को मिला न्याय, ₹2,040 करोड़ का भुगतान सुनिश्चित

जन एक्सप्रेस/लखनऊ: उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने वर्ष 2025 तक आवंटियों के हितों की रक्षा करते हुए एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। वर्षों से लंबित पड़े रियल एस्टेट विवादों पर निर्णायक कार्रवाई करते हुए यूपी रेरा ने कुल 11,300 मामलों का सफल समाधान कराया है। इन मामलों से जुड़ी ₹5,920 करोड़ मूल्य की संपत्तियों का निस्तारण कर हजारों होम बायर्स को बड़ी राहत दी गई है।

यूपी रेरा द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया, सख्त वैधानिक कार्रवाई और आपसी सहमति के जरिए समाधान की नीति अपनाई गई, जिससे न केवल आवंटियों को उनका हक मिला बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में अनुशासन भी स्थापित हुआ।

7,752 मामलों में ₹2,040 करोड़ का भुगतान

यूपी रेरा के आदेशों के अनुपालन में अब तक 7,752 मामलों में कुल ₹2,040 करोड़ की राशि आवंटियों को दिलाई जा चुकी है। यह भुगतान सीधे प्रमोटरों से वसूल कर आवंटियों के बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा गया।

इन मामलों में सबसे प्रभावी भूमिका रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) की रही। यूपी रेरा ने भुगतान में टालमटोल करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 6,018 वसूली प्रमाणपत्र जारी किए, जिनके जरिए ₹1,505 करोड़ की राशि वसूल की गई।

इसके अलावा, 1,734 मामलों में वसूली प्रमाणपत्र जारी होने के बाद प्रमोटर और आवंटी के बीच आपसी सहमति बनी, जिसके तहत ₹535 करोड़ का भुगतान सुनिश्चित कराया गया।

सुनवाई के दौरान आपसी समझौते से मिला समाधान

यूपी रेरा ने केवल दंडात्मक कार्रवाई पर ही नहीं, बल्कि सौहार्दपूर्ण समाधान पर भी विशेष जोर दिया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की सहमति से किए गए समझौतों के आधार पर 3,073 मामलों का निस्तारण हुआ।

इन मामलों में लगभग ₹1,872 करोड़ मूल्य की संपत्तियों से जुड़े विवादों का समाधान किया गया। समझौतों को रेरा पोर्टल पर विधिवत अपलोड कराया गया और संबंधित पीठ द्वारा उन्हें रिकॉर्ड पर लेते हुए अंतिम निस्तारण किया गया।

यह प्रक्रिया न केवल तेज रही, बल्कि इससे आवंटियों और प्रमोटरों दोनों को लंबी कानूनी लड़ाई से राहत मिली।

कन्सिलिएशन फोरम बना विवाद समाधान का प्रभावी माध्यम

यूपी रेरा द्वारा स्थापित कन्सिलिएशन फोरम भी विवाद समाधान में बेहद कारगर साबित हुआ। इस मंच के माध्यम से 1,617 आवंटियों के मामलों का समाधान कराया गया, जिनसे जुड़ी संपत्तियों का कुल मूल्य ₹648 करोड़ रहा।

कन्सिलिएशन फोरम की खासियत यह रही कि यहां मुकदमेबाजी के बजाय संवाद को प्राथमिकता दी गई। आवंटी, प्रमोटर, दोनों पक्षों के संगठनों के प्रतिनिधि और रेरा द्वारा नियुक्त कन्सिलिएटर की मौजूदगी में बातचीत के जरिए समाधान निकाला गया।

इस व्यवस्था से समय, धन और मानसिक तनाव—तीनों की बचत संभव हो सकी।

स्वैच्छिक अनुपालन से 6,610 मामलों का निस्तारण

यूपी रेरा के आदेशों के तहत कई प्रमोटरों ने स्वैच्छिक रूप से आदेशों का पालन किया। इसके परिणामस्वरूप 6,610 मामलों में ₹3,400 करोड़ मूल्य की संपत्तियों से जुड़े विवाद बिना अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई के सुलझा लिए गए।

यह संकेत देता है कि यूपी रेरा की सख्त कार्यप्रणाली और निरंतर निगरानी से रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ी है।

रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी का बयान

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य होम बायर्स को समयबद्ध न्याय दिलाना और रियल एस्टेट क्षेत्र में विश्वास बहाल करना है।

उन्होंने कहा—

“जहां प्रमोटरों द्वारा आदेशों के पालन में अनावश्यक देरी की गई, वहां कड़े कानूनी कदम उठाते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए गए। वहीं, जहां संभव हुआ, वहां आपसी संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान को प्राथमिकता दी गई।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी रेरा आगे भी कानून के दायरे में रहते हुए आवंटियों के अधिकारों की पूरी मजबूती से रक्षा करता रहेगा।

होम बायर्स के लिए बड़ी राहत

यूपी रेरा की इस पहल से हजारों होम बायर्स को वर्षों से अटकी रकम वापस मिली है। साथ ही लंबित फ्लैट डिलीवरी, रिफंड और परियोजना संबंधी विवादों का समाधान होने से आम लोगों का भरोसा व्यवस्था पर और मजबूत हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी रेरा की यह सख्त लेकिन संतुलित कार्यशैली आने वाले समय में रियल एस्टेट सेक्टर को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाएगी।

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