जौनपुर में माटीकला कारीगरों को बड़ी सौगात, 50 शिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक वितरित

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: पारंपरिक माटीकला कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जौनपुर जनपद में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के तत्वावधान में जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, मतापुर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान 50 कारीगरों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक तथा 3 पगमिल वितरित किए गए। साथ ही एक दिवसीय माटीकला जागरूकता कार्यक्रम भी संपन्न हुआ, जिसमें 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
50 कारीगरों को मिला आधुनिक उपकरणों का लाभ
कार्यक्रम में लाभार्थी कारीगरों को आधुनिक तकनीक से युक्त इलेक्ट्रिक पॉटरी व्हील (विद्युत चालित चाक) प्रदान किए गए। इसके अलावा 3 पगमिल मशीनों का वितरण भी किया गया, जिससे मिट्टी को बेहतर तरीके से तैयार कर उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।
इस पहल से कारीगरों की उत्पादकता में वृद्धि होगी, समय की बचत होगी और आय में सुधार की संभावना बढ़ेगी। ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में हुआ वितरण
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मनोरमा मौर्या, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद जौनपुर, तथा अजीत प्रजापति, जिला अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी उपस्थित रहे। अतिथियों का बुके और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया।
मुख्य अतिथियों ने अपने हाथों से लाभार्थियों को विद्युत चालित चाक वितरित किए और माटीकला कारीगरों के उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार पारंपरिक शिल्पकारों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अंतिम पायदान पर खड़े कारीगरों तक लाभ पहुंचाया जा रहा है।
योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वी.के. सिंह ने माटीकला बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कारीगरों को सरकारी योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि माटीकला शिल्प को आधुनिक तकनीक से जोड़कर बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सकती है।
डिप्टी कमिश्नर इंडस्ट्रीज आशुतोष सहाय पाठक ने उद्योग विभाग की स्वरोजगार एवं वित्तीय सहायता संबंधी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और विपणन सहयोग के माध्यम से कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
जागरूकता कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागी
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित जागरूकता सत्र में 200 से अधिक कारीगरों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने आधुनिक डिज़ाइन, उत्पाद विविधीकरण, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग के महत्व पर प्रकाश डाला।
कारीगरों को बताया गया कि पारंपरिक माटीकला उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से जोड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
आयोजन में रहे कई अधिकारी मौजूद
कार्यक्रम का संचालन सहायक आयुक्त उद्योग जय प्रकाश ने किया। इस अवसर पर परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी वाराणसी मंडल वाराणसी यू.पी. सिंह, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र जौनपुर, ब्लॉक प्रमुख सुइथाकला डॉ. उमेश चन्द्र तिवारी सहित विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सभी वक्ताओं ने माटीकला शिल्प को सांस्कृतिक विरासत बताते हुए इसे संरक्षित और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
माटीकला कारीगरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
-
उत्पादन क्षमता में वृद्धि
-
समय और श्रम की बचत
-
आधुनिक बाजार से जुड़ने का अवसर
-
स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
-
पारंपरिक शिल्प का संरक्षण
जौनपुर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल कारीगरों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।






