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पाठा में बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा का कैंडिल मार्च: आयुष हत्याकांड के आरोपियों को फांसी की मांग

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट: चित्रकूट जिले के बरगढ़ थाना क्षेत्र में कपड़ा व्यापारी अशोक केशरवानी के 13 वर्षीय पुत्र आयुष उर्फ “छोटू” की निर्मम हत्या के मामले में जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पाठा क्षेत्र में बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा ने इस घटना के विरोध में कैंडिल मार्च निकालकर अपनी मांगों को मुखर किया।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व एडवोकेट प्रखर पटेल और समाजसेवी मुकेश कुमार ने किया। सैकड़ों युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने हाथों में जलती मोमबत्तियां लेकर पैदल मार्च किया। march की शुरुआत बजरंग इंटर कॉलेज, सपहा से हुई और प्रदर्शनकारी गिरधार बाबा मडैयन मोड़ पहुंचे। इस दौरान आयुष की फोटो पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई।

प्रखर पटेल ने कहा कि “आयुष के हत्यारों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। ऐसे निर्मम अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ही समाज में न्याय सुनिश्चित कर सकती है।”

साथ ही, मुकेश कुमार ने कहा कि सिर्फ फांसी ही पर्याप्त नहीं है। हत्यारों के घरों पर बुलडोज़र कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएं और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। “जब तक बचे हुए अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं होती, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा चुप नहीं रहेगा,” उन्होंने स्पष्ट कहा।

जनभागीदारी और विरोध प्रदर्शन की विशेषताएं

कैंडिल मार्च में सैकड़ों स्थानीय निवासी शामिल हुए। इसमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • कमलेश प्रसाद, प्रधानाचार्य

  • सुशील सिंह, सहायक अध्यापक

  • विनोद, विद्यालय प्रबंधक

  • विपिन, अंकित (डॉक्टर), संदीप, यशवंत, राज (पशु चिकित्सक)

  • उमेन्द्र, वीरेंद्र, संजय साहू, अतिथ, इंद्र पाल, विपिन मिश्रा, अजय शहदेव, सुधाकर, पिन्टू, आशीष, जगजीवन, त्रिपुरारी

सभी ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से मार्च किया और आयुष की याद में सम्मान व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी जोर देकर कह रहे थे, “हत्या के दोषियों को फांसी दो, फांसी दो।”

स्थानिक प्रशासन और मुख्यमंत्री से अपील

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय प्रशासन और मुख्यमंत्री से अपील की कि आयुष हत्याकांड के दोषियों को तुरंत फांसी दी जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए। इसके अलावा, उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने और पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की।

सामाजिक और नैतिक संदेश

इस तरह के कैंडिल मार्च केवल न्याय की मांग तक सीमित नहीं रहते। यह समाज में अपराध के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों में न्याय के लिए सामूहिक आवाज उठाने का भी माध्यम हैं। बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा ने इस आंदोलन के माध्यम से यह संदेश दिया कि बच्चों के साथ हिंसा और हत्या जैसी घटनाओं को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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