
जन एक्सप्रेस नई टिहरी। उत्तराखंड की राजनीति में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राकेश राणा ने राज्य सरकार के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह राजनीतिक हित साधने का प्रयास बताया है।राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने करीब साढ़े चार वर्षों तक अधूरे मंत्रिमंडल के साथ काम किया और अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तब अचानक मंत्रिमंडल का विस्तार करना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम विकास के लिए नहीं, बल्कि चुनावी लाभ के लिए उठाया गया है।उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल में शामिल किए गए कई नेता पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। ऐसे में भाजपा द्वारा अपने ही कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करना यह दर्शाता है कि पार्टी को अपने समर्पित नेताओं पर भरोसा नहीं है।
राणा ने दावा किया कि पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक और कार्यकर्ता लंबे समय से मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया गया, जिससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ सकता है।प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक समस्याओं में लगातार वृद्धि हुई है। युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, महिलाएं आर्थिक दबाव झेल रही हैं और बुजुर्ग अपनी पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि नोटबंदी से लेकर कोरोना काल और वर्तमान में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जनता को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा है। इससे साफ है कि सरकार आम जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है।
अंत में राणा ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि जो विकास कार्य इतने वर्षों में पूरे नहीं हो सके, क्या वे अब कुछ महीनों में पूरे हो पाएंगे।






