जौनसार बावर और पछवा दून में चैत्र नवरात्रि की धूम: ‘आठों पर्व’ की अनूठी परंपरा और भक्ति का संगम

जन एक्सप्रेस/ विकासनगर : देवभूमि उत्तराखंड के जौनसार बावर और पछवा दून क्षेत्रों में चैत्र नवरात्रि का पर्व अगाध श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पहाड़ों की कंदराओं से लेकर मैदानों तक माता रानी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। ग्रामीणों ने अपने घरों में कलश स्थापना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
जौनसार बावर: ‘आठों पर्व’ की अनोखी परंपरा
जौनसार बावर क्षेत्र में नवरात्रि मनाने का ढंग अपनी लोक संस्कृति के कारण बेहद खास है। यहाँ नौ रूपों की सामान्य पूजा के बजाय महागौरी की आराधना पर विशेष जोर दिया जाता है।
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मुख्य रस्म: अष्टमी के दिन परिवार के मुखिया व्रत रखकर मां का विशेष पूजन करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘आठों पर्व’ कहा जाता है।
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पारंपरिक भोग: इस अवसर पर घरों में स्थानीय पकवान बनाए जाते हैं और माता को समर्पित किए जाते हैं, जो यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
पछवा दून: मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़
पछवा दून के विकासनगर, सहसपुर और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही मंदिरों में लंबी कतारें देखी गईं। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के साथ-साथ हवन, जाप और सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। स्थानीय निवासी रिंकू कनौजिया ने बताया कि नवरात्रि यहाँ नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करती है।
भजन-कीर्तन और लोक संस्कृति का संगम
क्षेत्र के गांवों में महिलाएं और बच्चे दिन भर भजन-कीर्तन में लीन नजर आए। कई स्थानों पर सामूहिक कथा और कन्या पूजन के आयोजन भी किए जा रहे हैं। नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरा क्षेत्र शांति और सद्भाव के रंग में रंगा हुआ है।
राम नवमी की भव्य तैयारियां
नवरात्रि के समापन और राम नवमी के उपलक्ष्य में क्षेत्र के सिद्धपीठों और मंदिरों में विशेष भंडारों और शोभायात्राओं की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। जौनसार बावर और पछवा दून के लोगों ने मां भगवती से पूरे विश्व के कल्याण और खुशहाली की प्रार्थना की है।






