प्रयागराज में बाढ़ का कहर! गंगा-यमुना का फर्क मिटा
हनुमान जी तक जल समाधि में, संगम नगरी में बाढ़ का महासंकट; मकानों की पहली मंजिल तक डूबी, हजारों लोग बेघर

जन एक्सप्रेस प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज इस समय अब तक की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रही है। हालात इतने भयावह हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि कहां गंगा बह रही है और कहां यमुना।
किला घाट से लेकर झूंसी तक पूरा इलाका एक विशाल जलराशि में तब्दील हो गया है। पानी की रफ्तार और स्तर इतना बढ़ गया है कि बड़े हनुमान जी की मूर्ति तक जल समाधि ले चुकी है। अब सिर्फ मंदिर की धर्मध्वजा ही दिखाई दे रही है।
सैकड़ों मकान डूबे, हजारों लोग विस्थापित
गंगा किनारे के इलाके — बेला कछार, राजापुर, तेलियरगंज, बघाड़ा, सोनौटी और सलोरी — जलमग्न हो चुके हैं। कर्जन पुल, शंकर घाट और दारागंज के कई मकान पूरी तरह से डूब चुके हैं।
जिन घरों में एक या दो मंजिल हैं, उनके निवासी या तो शरणालयों में चले गए हैं या ऊपरी मंजिलों पर ठिकाना बना लिया है।
खाने-पीने की चीज़ें या तो बह गई हैं या खराब हो चुकी हैं।
एनडीआरएफ मोर्चे पर, हर बस्ती में पहुंचने की कोशिश
एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। घर-घर पहुंचकर खाद्य सामग्री, दवाइयां और जरूरी सहायता पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में ज्यादातर प्रतियोगी छात्र रहते हैं, जिनके सामने अब आवास, भोजन और पढ़ाई तीनों की चुनौती खड़ी हो गई है।
275 गांव और 61 शहर की बस्तियां बुरी तरह प्रभावित
अब तक की जानकारी के अनुसार, जिले के 275 गांव और प्रयागराज शहर की 61 बस्तियां पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन ने कुछ स्थानों पर राहत शिविर बनाए हैं लेकिन पीड़ितों की संख्या के मुकाबले सुविधाएं बेहद सीमित हैं।
संगम तट से शंकर विमान मंडप तक जल का कहर
संगम तट पर बना शंकर विमान मंडप भी गंगा की उफनती लहरों से अछूता नहीं रहा।
श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक अब तटों पर आने से भी डर रहे हैं। बाढ़ ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी असर डाला है।
प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण परीक्षा
हालात को देखते हुए यह साफ है कि प्रशासन के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी हो गई है। राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि बाढ़ पीड़ितों को भोजन, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर मिल सकें।






