उत्तर प्रदेशचित्रकूट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया घाट सौंदर्यीकरण का वादा

सनातन संस्कृति की गौरवगाथा के साक्षी बने राजापुर: संतों को किया नमन, तुलसीदास की विचारधारा को बताया आज भी प्रासंगिक

जन एक्सप्रेस चित्रकूट, राजापुर | विशेष संवाददाता  गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मस्थली राजापुर में गुरुवार को भव्य तुलसी जन्मोत्सव का आयोजन हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस अवसर पर राजापुर पहुंचे और संत समाज, विद्वानों तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री ने मंच से कहा, “मैं स्वतंत्र देव सिंह जी को विशेष रूप से साथ लेकर आया हूं ताकि यहां के घाटों को और भी सुंदर और भव्य रूप दिया जा सके। राजापुर जैसे तीर्थों का कायाकल्प हमारी प्राथमिकता है।”

संतों और संस्कृति का सम्मान

मंच पर उपस्थित साध्वी नीलम गायत्री जी, पंडित जयप्रकाश मिश्रा जी, डॉ. मदन मोहन मिश्रा जी, गोस्वामी डॉ. अजीतमल भट्ट जी, डॉ. महादेव प्रसाद मेहता जी व स्वामी बालकृष्णाचार्य जी सहित अनेक संतों को मुख्यमंत्री ने नमन किया और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस पावन अवसर पर तुलसीदास जी की जयंती पर उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है।”

तुलसीदास: धर्म और आत्मबल के प्रतीक

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में तुलसीदास जी के जीवन दर्शन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “गुलामी के उस कालखंड में जब अनेक राजा-महाराजा विदेशी आक्रांताओं के समक्ष समर्पण कर चुके थे, तब एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले तुलसीदास जी ने रामभक्ति के माध्यम से भारतवर्ष को नई चेतना दी।”

मुख्यमंत्री ने तुलसीदास जी के दरबारी कवि बनने से इंकार और प्रभु श्रीराम के चरणों में पूर्ण समर्पण को भारतीय आत्मबल और आत्मगौरव का सर्वोच्च उदाहरण बताया।

मॉरीशस की धरती तक फैली रामकथा की गूंज

मुख्यमंत्री ने अपने विदेश दौरे का भी उल्लेख किया, “कुछ वर्षों पूर्व जब मुझे मॉरीशस जाने का अवसर मिला, वहां 150 वर्ष पहले गुलाम बनाकर ले जाए गए भारतीयों में रामायण और तुलसीदास जी की रचनाओं की गूंज आज भी सुनाई देती है।”

तुलसी अवॉर्ड और रत्नावली सम्मान

इस कार्यक्रम के अंतर्गत कई विद्वानों को तुलसी अवॉर्ड और रत्नावली सम्मान से नवाज़ा गया। मुख्यमंत्री ने इस सम्मान को सनातन धर्म और संस्कृति के प्रति उनकी सेवाओं का सच्चा मूल्यांकन बताया।

संत-महापुरुषों का अभिनंदन

मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज और कथा व्यास पूज्य मुरारी बापू का भी हृदय से अभिनंदन किया और कहा, “यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। इस भूमि ने तुलसीदास ही नहीं, ऋषि वाल्मीकि जैसे महान संतों को जन्म दिया है। यह हमारी अस्मिता का प्रतीक है।”

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