चिन्यालीसौड़: ज्ञान और नवाचार ही राष्ट्र की असली पूंजी, राजकीय महाविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार पर विशेष मंथन

जन एक्सप्रेस/ चिन्यालीसौड़: वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में ज्ञान और नवाचार की सुरक्षा अनिवार्य हो गई है। इसी उद्देश्य के साथ राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में ‘यूकास्ट’ (UCAST), उत्तराखंड के सहयोग से बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषयक व्याख्यानमाला के चतुर्थ सत्र का सफल आयोजन किया गया।
हाइब्रिड मोड में हुआ आयोजन
प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित यह कार्यक्रम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संपन्न हुआ। इसमें महाविद्यालय के प्राध्यापकों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शिरकत की।
उच्च शिक्षा में IPR की भूमिका पर चर्चा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड के पूर्व निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पांडे ने ऑनलाइन जुड़कर “उच्च शिक्षा में आईपीआर की आवश्यकता” पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में होने वाले शोध, प्रोजेक्ट और स्टार्टअप को कानूनी सुरक्षा देना समय की मांग है। पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन जैसे पहलू किसी भी शोधकर्ता की बौद्धिक संपदा को वैश्विक पहचान दिलाते हैं।”
व्यावसायिक उपयोग और संरक्षण पर जोर
वाणिज्य विभाग की प्राध्यापिका डॉ. सुगंधा वर्मा ने पीपीटी (PPT) के माध्यम से बौद्धिक संपदा के ‘कमर्शियलाइजेशन’ यानी व्यावसायिक उपयोग पर जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि केवल नवाचार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से संरक्षण और उपयोग करना भी आवश्यक है।
नवाचार के प्रति छात्र हुए जागरूक
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रभात द्विवेदी ने शोध के क्षेत्र में विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. किशोर सिंह चौहान ने छात्रों से नवाचार के प्रति सदैव सजग रहने का आह्वान किया।
सफल संचालन और तकनीकी सहयोग
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुगंधा वर्मा ने किया। तकनीकी व्यवस्थाओं में डॉ. बृजेश चौहान, डॉ. भूपेश चन्द्र पंत एवं डॉ. आलोक बिजल्वाण का विशेष सहयोग रहा। अंत में कार्यक्रम संयोजक एवं आईपीआर प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।






