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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का कथित इस्तीफा, UGC नियमों और माघ मेले की घटना को लेकर विवाद

जन एक्सप्रेस/बरेली: प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुई एक विवादित घटना और UGC Regulations 2026 के विरोध को लेकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वायरल संदेशों में लिखा गया है कि अग्निहोत्री ने माघ मेले में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज से जुड़े ब्राह्मण बटुक शिष्यों के साथ कथित मारपीट और UGC के नए नियमों के विरोध में आहत होकर तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस संदेश को “पहला प्रशासनिक इस्तीफा” करार देते हुए व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है। वायरल संदेश ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बना दिया है।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से इस इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही किसी स्तर पर यह जानकारी दी गई है कि इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं।

माघ मेले में हुई कथित घटना

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य से जुड़े ब्राह्मण बटुक शिष्यों के साथ कथित मारपीट की घटना पहले ही संत समाज में विवाद का कारण बनी हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ युवाओं ने इन शिष्यों की चोटी पकड़कर उन्हें प्रताड़ित किया, जिससे संत समाज में काफी रोष उत्पन्न हुआ।

इस घटना के बाद प्रशासनिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई। माघ मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है, और यहाँ किसी भी तरह की अशांति या विवाद को लेकर तुरंत प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

UGC Regulations 2026 का विरोध

दूसरी ओर, UGC Regulations 2026 को लेकर भी कई शिक्षाविदों और संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। नए नियमों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के संचालन, शोध और शिक्षा प्रणाली को लेकर कई बदलाव किए गए हैं। इसके विरोध में कई विद्वान और छात्र संगठन सड़कों पर उतर चुके हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल संदेश में इसे भी सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे का कारण बताया गया है। संदेश में कहा गया है कि अग्निहोत्री ने “UGC के नए नियमों के विरोध में” इस्तीफा दिया है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

जिला प्रशासन ने फिलहाल इस दावे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। न ही किसी सरकारी पोर्टल या प्रेस विज्ञप्ति में इस इस्तीफे की पुष्टि की गई है। यह मामला अभी चर्चा का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें अक्सर तेजी से फैलती हैं, लेकिन वास्तविकता की पुष्टि के बिना उन्हें सटीक समाचार के रूप में नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यदि यह इस्तीफा सच साबित होता है, तो यह प्रशासनिक क्षेत्र में पहला ऐसा मामला होगा, जब किसी अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से अपने विरोध के चलते इस्तीफा दिया हो। सोशल मीडिया पर इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

संत समाज के सदस्य और शिक्षाविद इसे दोनों ही घटनाओं—UGC नियमों और माघ मेले की मारपीट—के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के तौर पर देख रहे हैं।

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