श्रीराम कथा में उमड़ा जनसैलाब: त्याग और मर्यादा का संदेश, भावुक हुए श्रद्धालु

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिससे पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।
श्रीराम के त्याग ने नम कर दी आंखें
कथा व्यास राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्रभु ने पिता के वचन की मर्यादा और माता की इच्छा पूर्ण करने के लिए राजसिंहासन का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
वाल्मीकि मिलन और सुग्रीव मित्रता का प्रसंग
कथा के दौरान वनगमन, महर्षि वाल्मीकि से मिलन, हनुमान जी और सुग्रीव की मित्रता तथा बालि वध का प्रसंग भी सुनाया गया। इन प्रसंगों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया और पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयकारे गूंज उठे।
“भगवान को वही जान सकता है…” – राजन जी महाराज
कथा व्यास ने कहा:
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“भगवान को वही जान सकता है जिसे भगवान जानना चाहते हैं।”
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“यदि कोई दावा करे कि वह भगवान से मिला देगा, तो उससे तुरंत दूर हो जाएं।”
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“जीवन में सबसे कठिन कार्य शुरुआत करना है, लेकिन एक बार शुरुआत हो जाए तो लक्ष्य तक पहुंचना निश्चित है।”
भक्ति गीतों से बना भक्तिमय माहौल
लोकभाषा में गाए गए भक्ति गीतों ने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया। श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए।
आरती और प्रसाद वितरण के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में भव्य आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।
आयोजकों ने जताया आभार
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजकों—सुमित अग्रहरि, अमित अग्रहरि, श्रीश अग्रहरि, आनंद अग्रहरि, विशाल अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, सुनील अग्रहरि (टप्पू), श्रीष मोदनवाल, कृष्णकांत सोनी, रामअवतार अग्रहरि, अश्वनी अग्रहरि, विवेक सोनी एवं सीम प्रकाश अग्रहरि—ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।






